बैतूल , मार्च 20 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले स्थित अम्बे माई धाम में चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच प्राकृतिक गुफाओं में विराजी मां अम्बे के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। नवरात्र के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की गई है।
यह धाम बैतूल मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर धारुल गांव के समीप स्थित है। अपनी विशिष्ट भौगोलिक संरचना के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित प्राकृतिक गुफाएं आधा किलोमीटर से अधिक गहराई तक फैली बताई जाती हैं। गुफाओं के भीतर सालभर ठंडक बनी रहती है तथा यहां बहने वाले प्राकृतिक जलस्रोत वातावरण को और भी मनोहारी बनाते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन गुफाओं में सैकड़ों वर्षों से मां अम्बे की सिंदूरी प्रतिमा स्थापित है। ग्रामीणों का विश्वास है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां आकर मां की आराधना की थी। इसके अलावा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आदिवासी नायक टंट्या भील द्वारा भी इन गुफाओं में शरण लेने की कथाएं प्रचलित हैं, जिससे इस स्थल का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
बताया जाता है कि 1970 के दशक में मंगला माई नामक महिला के यहां आगमन के बाद यह स्थान व्यापक रूप से आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। वर्तमान में गुफा के प्रवेश द्वार पर उनकी प्रतिमा स्थापित है और श्रद्धालु पहले उनके दर्शन कर मां अम्बे के दरबार में प्रवेश करते हैं।
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