श्रीनगर , जून 29 -- जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने नर्स सरला भट (27) के अपहरण और हत्या के 35 से अधिक वर्षों के बाद प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के पांच गुर्गों के खिलाफ सोमवार को 737 पत्रों का आरोप पत्र दायर किया, जिसमें जेल में बंद संगठन का प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक भी शामिल है।
टाडा और पोटा मामलों के लिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और एनआईए अधिनियम के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश (श्रीनगर) की अदालत में दाखिल आरोप पत्र में कहा गया है कि एसआईए की जांच से यह साबित हुआ है कि सरला की हत्या हिंसा की कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि जेकेएलएफ के दिशा निर्देश में रची गई एक बड़ी आतंकवादी साजिश का हिस्सा थी।
शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसकेआईएमएस) में नर्स और अनंतनाग की रहने वाली सरला भट उन कुछ कश्मीरी पंडितों में से एक थीं, जिन्होंने 1990 में उग्रवाद शुरू होने के बाद भी घाटी में ही रहने का फैसला किया था। आरोप है कि 18 अप्रैल 1990 को जेकेएलएफ के उग्रवादियों ने एसकेआईएमएस से उनका अपहरण कर लिया और गोली मारकर हत्या कर दी। अगले दिन मालाबाग इलाके से उनका गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ, जिसके साथ एक नोट भी मिला जिसमें उन पर मुखबिर होने का आरोप लगाया गया था। पहचाने गए जेकेएलएफ के पांच सदस्यों में से तीन की मौत हो चुकी है, एक हिरासत में है और एक फरार है।
जांच में अपहरण और बेरहमी से हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में जेकेएलएफ के तत्कालीन चीफ कमांडर मोहम्मद यासीन मलिक के साथ-साथ खुर्शीद अहमद चालकू, अब्दुल हामिद शेख, मोहम्मद यूसुफ सूफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की भूमिका का पता चला है। जबकि हामिद शेख, यूसुफ सूफी और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है, वहीं यासीन मलिक अभी एक दूसरे मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। फरार आतंकवादी खुर्शीद चालकू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
एसआईए का कहना है कि इसी व्यक्ति ने गोली चलाई थी और माना जाता है कि वह पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) भाग गया है।
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