बैतूल , अगस्त 24 -- मां नर्मदा के साथ सूर्यपुत्री तापी को भी विकास, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग उठी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मां तापी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कपूर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष सरकार की 'नमामि नर्मदे परियोजना' का नाम बदलकर 'नमामि नर्मदे तापी परियोजना' किए जाने का सुझाव रखा है। उनका कहना है कि इससे मध्यप्रदेश की दोनों प्रमुख जीवनदायिनी नदियों को समान सांस्कृतिक और विकासात्मक पहचान मिल सकेगी।
श्री कपूर के अनुसार नर्मदा और तापी केवल जलधाराएं नहीं हैं, बल्कि मध्यप्रदेश की धार्मिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान से गहराई से जुड़ी हैं। तापी को परियोजना के नाम और व्यापक विकास दृष्टिकोण में शामिल करने से तापी तट से जुड़े क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिल सकती है। इससे धार्मिक पर्यटन, नगरीय सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि वह पिछले 19 वर्षों से मां तापी की परिक्रमा के माध्यम से नदी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2006 से जारी इस अभियान का उद्देश्य तापी नदी से जुड़े धार्मिक स्थलों और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना रहा है। उनका मानना है कि तापी को बड़े विकास विजन का हिस्सा बनाए जाने से इसके तटवर्ती क्षेत्रों में पर्यटन की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
श्री कपूर ने कहा कि नर्मदा और तापी को साझा परियोजना की पहचान से जोड़ने पर दोनों नदियों से जुड़े धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। तापी किनारे बसे शहरों और नगरीय निकायों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने तापी के उद्गम, धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं को व्यवस्थित रूप से विकसित एवं प्रचारित करने की आवश्यकता बताई। इससे नई पीढ़ी को दोनों नदियों के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने में भी मदद मिलेगी।
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