बैतूल , मई 19 -- आदिवासी क्षेत्रों में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) 1996 के क्रियान्वयन में कार्यरत नर्मदापुरम संभाग के 315 पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। पंचायत राज संचालनालय द्वारा जारी आदेश के बाद प्रभावित कर्मचारियों में नाराजगी और असमंजस की स्थिति है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेवा समाप्ति से पहले इन मोबिलाइजरों को पिछले 10 माह से मानदेय का भुगतान भी नहीं किया गया। नर्मदापुरम संभाग में बैतूल जिले के 263 तथा नर्मदापुरम जिले के 52 पेसा मोबिलाइजर इस निर्णय से प्रभावित हुए हैं।
पेसा मोबिलाइजर ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन, ग्रामीणों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सरकार और गांव के बीच सेतु के रूप में कार्य कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2024 में पेसा मोबिलाइजरों का मानदेय चार हजार रुपये से बढ़ाकर आठ हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की थी। हालांकि यह वृद्धि लागू नहीं हो सकी और कई महीनों से मानदेय बकाया रहा। पंचायत राज संचालनालय ने राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना की अवधि समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायतों के माध्यम से कार्यरत मोबिलाइजरों को तत्काल कार्यमुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
बैतूल जिले में आठनेर विकासखंड में 44, भैंसदेही में 48, भीमपुर में 50, चिचोली में 32, घोड़ाडोंगरी में 50 तथा शाहपुर में 39 पेसा मोबिलाइजर कार्यरत थे। पेसा मोबिलाइजर रितेश बकोरिया ने कहा कि लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण अनेक कर्मचारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बकाया भुगतान और सेवाएं बहाल नहीं होने पर जिले के पेसा मोबिलाइजर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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