भिण्ड , अगस्त 03 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले की लहार तहसील के नरौल गांव में मुक्तिधाम नहीं होने के कारण ग्रामीणों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले मैदान अथवा सोनभद्रिका नदी के किनारे करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस मूलभूत सुविधा के अभाव पर प्रशासन से शीघ्र मुक्तिधाम निर्माण की मांग की है।
धरमपुरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले करीब 1500 की आबादी वाले नरौल गांव में मुक्तिधाम का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर सोनभद्रिका नदी के किनारे जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है। बारिश के कारण लकड़ियां भीग जाने से चिता जलाने में परेशानी होती है और परिजनों को तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। नदी किनारे न तो शेड है, न चबूतरा और न ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था है, जिससे बारिश में पूरा क्षेत्र कीचड़ में तब्दील हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम के लिए शासकीय भूमि उपलब्ध है और मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय ग्रामीण अटल तिवारी, पुत्तू बघेल, रमाशंकर और नितिन कांकोरिया ने बताया कि किसी परिजन की मृत्यु के समय परिवार पहले से ही शोक में होता है, ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान नहीं होने से अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार बारिश के दौरान ग्रामीण तिरपाल पकड़कर खड़े रहते हैं, ताकि चिता पूरी तरह जल सके।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की अंतिम विदाई सम्मान और गरिमा के साथ होनी चाहिए, लेकिन मुक्तिधाम के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है। उनका कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मांग करने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। इस संबंध में लहार जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) आकाश धार्वे ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए नरौल गांव में शीघ्र मुक्तिधाम का निर्माण कराया जाएगा।
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