श्रीगंगानगर , अप्रैल 01 -- केंद्र सरकार के नये श्रम कानूनों के विरोध में भारतीय ट्रेड यूनियन से जुड़े विभिन्न श्रमिक संगठनों ने बुधवार को हनुमानगढ़ में 'काला दिवस' मनाया।
मजदूरों ने काली पट्टियां बांधकर और काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन देकर नयी श्रम संहिताओं को तुरंत रोकने की मांग की । संगठनों का आरोप है कि इन कानूनों को ट्रेड यूनियनों और मजदूर प्रतिनिधियों से बिना किसी सार्थक चर्चा या परामर्श के लागू किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता रघुवीर वर्मा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पूरे देश में मजदूर वर्ग इन नीतियों का विरोध कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के विरुद्ध हैं और इनसे उनके अधिकारों में भारी कटौती होने वाली है। उन्होंने विस्तार से बताया कि नए कानूनों के कारण काम के घंटे बढ़ सकते हैं, श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा जिससे स्थायी नौकरियों में कमी आएगी और ट्रेड यूनियनों के अधिकार भी सीमित हो जाएंगे।
श्री वर्मा ने कहा कि मजदूरों ने लंबे संघर्ष के बाद जो अधिकार हासिल किए थे, वे अब कमजोर पड़ रहे हैं। न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर इन कानूनों का नकारात्मक असर पड़ेगा। ट्रेड यूनियनों ने साफ चेतावनी दी है कि सरकार ने इन श्रम कानूनों को वापस नहीं लिया या उन पर रोक नहीं लगाई, तो विरोध आंदोलन को और अधिक तेज और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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