नागपुर , अप्रैल 04 -- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि नयी शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ज्ञान का भारतीयकरण और भारतीय ज्ञान का वैश्वीकरण है।
उन्होंने कहा, " सिर्फ ऐतिहासिक गौरव का बखान करने से हम महान नहीं बनेंगे। इसके साथ हमें वर्तमान और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली को दिशा देनी होगी। "श्री फडणवीस महाराष्ट्र ज्ञान सभा-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन दे रहे थे। यह सम्मेलन राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, गोंडवाना विश्वविद्यालय, विश्वेश्वरय्या प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईएम नागपुर और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। पहली औद्योगिक क्रांति 1760 में हुई थी, और इसके बाद की तीन औद्योगिक क्रांतियों में करीब 250 साल लगे, लेकिन पिछले 15 वर्षों में ही तीन औद्योगिक क्रांतियां देखने को मिली हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम इस तेजी को नहीं समझ पाये, तो पीछे रह जाएंगे।
श्री फडणवीस ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीप टेक्नोलॉजी के विकास में भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और यही इस परिवर्तन का प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने कहा, " हम शिक्षा नीति के माध्यम से ऐसे मानव संसाधन तैयार करना चाहते हैं, जिनका समग्र विकास हो और जिनमें नैतिक और पेशेवर मूल्यों का समावेश हो।"मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति को पेशेवर के रूप में देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के साथ-साथ शारीरिक, नैतिक और बौद्धिक रूप से सक्षम होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि आने वाले 1000 दिनों में 60 प्रतिशत नौकरियों की प्रकृति बदल जाएगी और डीप टेक और एआई सभी क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन ला रहे हैं। इसका मतलब बड़े पैमाने पर बेरोजगारी नहीं होगा, जैसा कि कंप्यूटर क्रांति के समय भी आशंकाएं जतायी गयी थीं, लेकिन भारत ने उस क्षेत्र में अपनी पहचान बनायी। उन्होंने कहा, " तकनीक कभी नहीं रुकती, हमें उसके साथ आगे बढ़ना होगा। विश्वविद्यालयों और शिक्षकों को यह तय करना होगा कि आज के समय में कौन से विषय प्रासंगिक हैं।"श्री फडणवीस ने कहा कि समाज में कुछ भी स्थिर नहीं रह सकता और शिक्षा क्षेत्र को भी नयी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना होगा।
उन्होंने बताया कि पहले विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रति भारत का रुख सकारात्मक नहीं था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। नवी मुंबई में 'एडुसिटी' विकसित की जा रही है, जहां छात्रों को कम लागत में विदेशी विश्वविद्यालयों की शिक्षा उपलब्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों को भी इस प्रतिस्पर्धामें उतरकर वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षा और उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। यह आयोजन नयी शिक्षा नीति के संदर्भ में विकसित महाराष्ट्र के लिए शिक्षा विषय पर केंद्रित है। इस अवसर पर शिक्षा और उद्योग जगत के कई प्रमुख व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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