चेन्नई , अगस्त 06 -- चेन्नई की जॉर्ज टाउन मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने गुरुवार को द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के पूर्व मंत्री के. पोनमुडी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया।
अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि उन्हें दो सितंबर तक अदालत में पेश किया जाए। यह मामला नफरत फैलाने वाले नफरत भरे भाषण से जुड़ा है, जिसमें शैव धर्म, वैष्णव धर्म और महिलाओं के बारे में कथित तौर पर विवादित टिप्पणियां की गयी थीं, जिनका मकसद धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और नफरत फैलाना था।
अप्रैल 2025 में, तमिलनाडु के तत्कालीन मंत्री पोनमुडी ने चेन्नई में शैव और वैष्णव अनुयायियों और महिलाओं को निशाना बनाते हुए एक विवादित भाषण दिया था। इन टिप्पणियों से लोगों में भारी गुस्सा फैल गया, जिसके कारण उन्हें द्रमुक पार्टी के पद से हटा दिया गया और बाद में राज्य कैबिनेट से भी बाहर कर दिया गया।
इस घटना के बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पार्षद उमा आनंदन ने उनके खिलाफ धार्मिक दुश्मनी फैलाने और धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने के आरोप में कार्रवाई की मांग करते हुए एक निजी शिकायत दर्ज कराई। जॉर्ज टाउन कोर्ट ने शिकायत का संज्ञान लिया और कार्यवाही शुरू की।
मद्रास उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2025 की घटना के तुरंत बाद उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी। हालांकि, 16 सितंबर 2025 को उच्च न्यायालय ने के. पोनमुडी द्वारा शैव और वैष्णव अनुयायियों और महिलाओं के खिलाफ दिए गए अपमानजनक भाषण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए शुरू की गयी रिट याचिका को बंद कर दिया।
कोर्ट ने यह फैसला इस आधार पर लिया कि पुलिस को उनके खिलाफ 100 से ज़्यादा शिकायतें मिली थीं, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के लिए कोई ठोस मामला न मिलने के कारण उन सभी शिकायतों को बंद कर दिया गया था।
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