पटना , अगस्त 08 -- ाज्यभर में व्यापार और आवागमन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गंगा (एनडब्ल्यू-1) और गंडक नदी, राष्ट्रीय जलमार्ग-37 (एनडब्ल्यू-37) में जल परिवहन का विकास तेजी से किया जा रहा है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की ओर से चिन्हित राष्ट्रीय जलमार्गों पर जल परिवहन से संबंधित जन सुविधाओं के लिए आवश्यक सामुदायिक जेटी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इनके जरिये यात्रियों और सामान की सुरक्षित एवं सुगम आवाजाही की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इनके निर्माण से नावों और जहाजों पर चढ़ने-उतरने में भी आसानी होती है। आईडब्ल्यूएआई सामुदायिक जेटी के निर्माण एवं दो साल तक सफल संचालन के बाद इसे इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट (आईडब्ल्यूटी), बिहार को हस्तानांतरित करता है।
परिवहन विभाग के अनुसार, 17 स्थानों में से 16 स्थानों पर नए सामुदायिक जेटी निर्माण के लिए जिलों से आईडब्ल्यूएआई को एनओसी मिल चुका है। इनमें पटना जिले के अंतर्गत एनआईटी (एनओसी अप्राप्त है), कंगनघाट, ग्यासपुर पीपापुल और महाजी पीपापुल, वैशाली जिले में कोनहराघाट और हाजीपुर, सारण में हरिहारनाथ मंदिर और सोनपुर, समस्तीपुर में पत्थरघाट और धरनीपट्टी पश्चिम, बेगुसराय में तीन (सिमरिया घाट, अयोध्या घाट और चित्रोघाट), वैशाली में दो जगहों, भागलपुर तथा आरा में एनडब्ल्यू-1 पर जेटी बनाने का काम प्रक्रियाधीन है। 10 स्टील जेटी का निर्माण शुरू भी हो चुका है।
इधर, गंडक नदी (एनडब्ल्यू-37) पर पश्चिम चंपारण में दो जेटी का निर्माण प्रस्तावित है, जिसका एनओसी चिन्हित स्थानों पर सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं रहने के कारण अभी प्राप्त नहीं हुआ है।
विभाग के सचिव राज कुमार ने बताया कि सामुदायिक जेटी नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों, व्यापारियों और यात्रियों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। वर्तमान में राज्यभर के 11 जिलों में एनडब्ल्यू-1 के किनारे कुल 21 सामुदायिक जेटी मौजूद है। यह भोजपुर जिले में खवासपुर और महुली घाट, पटना में पांच जगहों (दीघा, नकटा दियारा, पानापुर, नासरीगंज और बाढ़), भागलपुर में चार (तिनतंगा, सुल्तानगंज, कहलगांव, बटेश्वर्नाथ), वैशाली एवं तथा कटिहार में दो-दो, बक्सर, सारण, समस्तीपुर, बेगुसराय, मुंगेर तथा खगड़िया जिलों में एक-एक हैं। इनमें से कई स्टील और कई प्लास्टिक (एचडीपीई) से निर्मित हैं।
सचिव ने आगे कहा कि इन जेटी से स्थानीय उपज, माल और कार्गो की सस्ती ढुलाई और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन से सड़क परिवहन पर भी दबाव कम होता है। बिहार आने वाले दिनों में जल परिवहन का बड़ा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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