जयपुर , अगस्त 13 -- राजस्थान में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार द्वारा शुक्रवार को नगर निकायों एवं पंचायत राज संस्थाओं के सभापतियों की निकाली गयी लॉटरी में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तथा अनुसूचित जाति (एसी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आंकड़ों को अतार्किक करार दिया है।
श्री डोटासरा ने यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हमेशा कहते हैं कि भाजपा संविधान पर चोट कर रही है और आरक्षण को खत्म करना चाहती है, जबकि देश में एसी, एसटी और ओबीसी की जितनी आबादी है उसके हिसाब से उनकी भागीदारी एवं हिस्सेदारी होनी चाहिये। सरकार ने लम्बे समय से अनुसूचित जाति और जनजाति की जनगणना नहीं करवायी, जातिगत जनगणना से भी भाजपा कतरा रही है, क्योंकि उनके मन में बेईमानी है, ये लोग एससी एवं एसटी और अब ओबीसी के साथ न्याय नहीं करना चाहते और इसकी शुरुआत राजस्थान से की गयी है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार आंकड़े दिये हैं उनमें विसंगति है, पूरे राजस्थान के अन्दर जो ग्रामीण परिवेश की जनसंख्या ओबीसी की बतायी गयी है उसमें पंचायत समितियां की टोटल और जिला परिषद की जनसंख्या एक होनी चाहिये, इसमें फर्क नहीं होना चाहिये, किन्तु सरकार के आंकड़ों के अनुसार जिला परिषद के अंतर्गत और पंचायत समितियों की एक ही जिले की जनसंख्या में कई प्रतिशत अंतर है, ऐसा वास्तविक रूप से नहीं हो सकता है, क्योंकि शहरी क्षेत्र को निकालने के पश्चात ग्रामीण क्षेत्र में जिले की जो जनसंख्या बचेगी उसी से जिला परिषद और इस जनसंख्या की पंचायत समिति जिले में होनी चाहिये।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 41 जिला परिषद में 1403 जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र है, जिनमें से आयोग द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केवल 192 वार्ड आरक्षित करने की अनुशंसा की गयी है, जो मात्र 13.68 प्रतिशत है, जबकि यदि कुल 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा से भीतर रहते हुए भी ओबीसी के लिए आरक्षण किया जाता तो कुल 294 वार्ड आरक्षित होते, इस प्रकार ओबीसी वर्ग के लिए 102 वार्ड कम आरक्षित हुए हैं। इसी प्रकार राज्य में कुल 457 पंचायत समितियां में कुल 8245 पंचायत समिति सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्र हैं, इनमें से ओबीसी के लिए मात्र 1101 वार्ड आरक्षित करने की अनुशंसा की गयी है, जो केवल 13.35 प्रतिशत के लगभग है, जबकि यदि कुल 50 प्रतिशत की आरक्षण सीमा के भीतर रहते हुए ओबीसी के लिए 21 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये तो कुल 1731 वार्ड आरक्षित होते, इस प्रकार ओबीसी वर्ग के लिए 630 वार्ड कम आरक्षित किये गये हैं, जिसका कोई स्पष्ट कारण सरकार ने नहीं बताया है।
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