जगदलपुर , सितंबर 22 -- छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नगरनार स्टील प्लांट से प्रभावित ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं सहित विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मंगलवार से राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के मुख्य द्वार एक के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है।

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2001 में नगरनार में इस्पात संयंत्र के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों और ग्रामीणों के सर्वांगीण विकास को लेकर किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उनका दावा है कि पिछले एक वर्ष से एनएमडीसी प्रबंधन को पत्राचार के जरिए मांगों से अवगत कराया जा रहा है लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में कोपागुड़ा-खुटपदर में प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का निर्माण शुरू करने, स्थानीय भू-प्रभावित किसानों एवं बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए जगदलपुर-नगरनार मार्ग को सिक्स लेन में विकसित करने की मांग शामिल है।

इसके साथ ही प्रभावित गांवों में शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क और खेल सुविधाओं का विस्तार करने, स्थानीय मड़ई-मेला, होली एवं अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए दी जाने वाली वार्षिक सहयोग राशि बढ़ाने तथा संयंत्र से निकलने वाले दूषित जल से फसल प्रभावित होने की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने जल शोधन और पुनर्चक्रण की समुचित व्यवस्था की भी मांग रखी है।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से भर्ती में अधिकतम आयु सीमा 33 वर्ष से बढ़ाकर 40 वर्ष करने की मांग की गई है। नगरनार आईटीआई में राजमिस्त्री जैसे ट्रेड के स्थान पर इलेक्ट्रीशियन, फिटर और मैकेनिकल इंजीनियरिंग जैसे रोजगारपरक ट्रेडों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देने की मांग भी शामिल है।

प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2010 में चिन्हांकित 1,152 प्रभावित किसानों में से शेष 314 किसानों को एनएमडीसी में रोजगार दिया जाना चाहिए। रोजगार मिलने तक प्रभावित किसानों और उनके परिवारों को नि:शुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित