सुकमा , मई 20 -- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले का मिनपा क्षेत्र अब विकास और स्वास्थ्य सेवाओं की नई पहचान बनकर उभर रहा है। कभी झोपड़ी में संचालित होने वाला उप स्वास्थ्य केंद्र आज राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक प्राप्त कर क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी सुविधा बन गया है।

स्वास्थ्य विभाग से बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार मिनपा क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद, दुर्गम रास्तों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझता रहा। ऐसे हालातों में स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीण इलाकों में लगातार कैंप लगाकर लोगों तक उपचार और जागरूकता पहुंचाने का काम किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन जारी रखा गया।

वर्ष 2024 में राज्य सरकार की पहल पर मिनपा में नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण किया गया। नए भवन में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रयोगशाला कक्ष और आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था की गई। यह केंद्र अब मिनपा सहित दुलेड़, एलमागुंडा, भाटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दूरस्थ गांवों की लगभग 3,593 आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है। कई बार एक दिन में लौटना संभव नहीं होने पर स्वास्थ्य कर्मचारी गांवों में रुककर रात्रि शिविर आयोजित करते हैं और रात में ही मरीजों की जांच एवं उपचार करते हैं। स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की ओपीडी हो रही है, जबकि हर महीने करीब चार सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मितानिन, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर और सेक्टर चिकित्सा अधिकारी की मेहनत तथा जिला प्रशासन के सहयोग से 15 मई को केंद्र ने राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और प्रशासनिक संकल्प का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।

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