रायपुर/बस्तर , मई 18 -- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को बस्तर जिले के नेतानार गांव पहुंचे, जहां उन्होंने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) बी-80 कैंप परिसर में स्थापित "शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा" जनसुविधा केंद्र का उद्घाटन किया।
नक्सलवाद के खात्मे के बाद पहली बार बस्तर पहुंचे श्री शाह ने इसे बस्तर के विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई शुरुआत बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, मंत्री केदार कश्यप सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
गृह मंत्री ने दंतेश्वरी माता और छत्तीसगढ़ महतारी के जयघोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, कि नेतानार की भूमि देश के हर नागरिक के लिए तीर्थ समान है, क्योंकि यह शहीद वीर गुंडाधुर की जन्म और कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि 1910 में वीर गुंडाधुर ने बस्तर के आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था और आज उन्हीं की प्रेरणा से सुरक्षा कैंप सेवा कैंप में बदलकर लोगों की सेवा करेगा।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब यहां पुलिसकर्मियों की हत्या होती थी, स्कूल उजाड़ दिए जाते थे, राशन और बैंक जैसी सुविधाओं की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी लेकिन आज उसी नेतानार में सेवा डेरा खुल रहा है। श्री शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण यहां के बच्चों को शिक्षा से दूर कर बंदूक थमाई गई, जबकि अब सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का काम कर रही है।
श्री शाह ने कहा कि "नियद नेल्लानार" योजना के तहत गांवों में राशन दुकानें खुल रही हैं, आधार और राशन कार्ड बन रहे हैं, घरों तक पेयजल पहुंच रहा है और आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि सुरक्षा बलों ने आतंक फैलाने वालों का सफाया किया और सरकार ने पुनर्वास योजनाओं के जरिए लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा।
उन्होंने घोषणा की कि बस्तर के 196 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को इसी तरह सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इन केंद्रों में बैंकिंग, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं और स्वरोजगार से जुड़ी तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि "एक साल में सरकार को रायपुर से यहां तक लाएंगे, ताकि लोगों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए रायपुर न जाना पड़े।"श्री शाह ने कहा कि गुजरात की तर्ज पर बस्तर में डेयरी मॉडल विकसित किया जाएगा और आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा। साथ ही वनोपज की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का संकल्प भी सरकार ने लिया है। शाह ने कहा कि अब सरकार धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी और बच्चों को शिक्षा देकर सरकारी नौकरियों एवं उद्योगों में 15 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिलाया जाएगा।
अपने संबोधन में शाह ने कहा, "देश में आजादी बहुत पहले आ गई थी, लेकिन बस्तर में असली आजादी 31 मार्च 2026 को आई है।" उन्होंने लोगों से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने और भटकाने वाली बातों से दूर रहने की अपील की।
इस दौरान श्री शाह ने इमली प्रसंस्करण केंद्र का भी निरीक्षण किया और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की। उन्होंने बस्तर की इमली का स्वाद चखते हुए कहा कि "यहां की इमली खट्टी नहीं बल्कि बहुत मीठी है।" महिला समूह की सदस्य लंबी नाग ने बताया कि इमली प्रसंस्करण से समूह की महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक आय अर्जित कर सकेंगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित