जालंधर , जून 12 -- पंजाब के पुलिस महानिदेशक विशेष अमरदीप सिंह राय ने शुक्रवार को कहा कि नकली उत्पादों के कारोबार और तस्करी ने आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं। इन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कानून प्रवर्तन, निरंतर क्षमता निर्माण और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में आयोजित 'टैकलिंग काउंटरफिटिंग एंड स्मगलिंग: स्ट्रेटेजीज फॉर इफेक्टिव एनफोर्समेंट' विषयक क्षमता निर्माण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नकली सामान और तस्करी न केवल वैध कारोबार और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं तथा अवैध नेटवर्क को बढ़ावा देते हैं।

यह कार्यक्रम एफआईसीसीआई कासकेड द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, सरकारी प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर मोहम्मद तैयब ने कहा कि आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए संस्थागत तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तस्करी और अवैध व्यापार के नेटवर्क लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं, ऐसे में जांच एजेंसियों को आधुनिक ज्ञान, कौशल और संसाधनों से लैस होना होगा।

पंजाब गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव अंकुरजीत सिंह ने कहा कि नकली सामान और तस्करी अब केवल आर्थिक अपराध नहीं रह गये हैं, बल्कि इनका संबंध संगठित अपराध से भी जुड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावी कार्रवाई के लिए खुफिया आधारित पुलिसिंग, विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग और अवैध व्यापार के नए रुझानों की जानकारी आवश्यक है।

दीप चंद ने कहा कि अवैध व्यापार से वैध उद्योगों को भारी नुकसान होता है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी होती हैं। उन्होंने कहा कि नकली और तस्करी के सामान से बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है, सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और उपभोक्ताओं तक असुरक्षित उत्पाद पहुंचते हैं।

कार्यक्रम में आशीष पॉल ने कहा कि तस्करी और नकली उत्पादों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए उद्योग, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने अवैध व्यापार के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधिकारियों को प्रभावी प्रवर्तन रणनीतियों, जांच तकनीकों और अंतर-विभागीय सहयोग के महत्व से अवगत कराया। वक्ताओं ने कहा कि जागरूकता, प्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता बढ़ाकर ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सकता है।

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