धार , जनवरी 13 -- विश्वविख्यात बाग प्रिंट कला के नकली उत्पादों पर रोक लगाने की मांग को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में बाग प्रिंट कलाकारों ने धार कलेक्टर प्रियंक मिश्र को ज्ञापन सौंपा। कलाकारों ने मशीन और स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार किए जा रहे नकली बाग प्रिंट उत्पादों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर मिश्र ने इस मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

ज्ञापन में कलाकारों ने कहा कि नकली उत्पादों के कारण बाग प्रिंट कला के अस्तित्व पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने 23 दिसंबर को धार में आयोजित एक कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित अन्य मंचासीन अतिथियों को नकली बाग प्रिंट के स्टॉल भेंट किए गए थे। इस संबंध में बाग के रंगकर्मियों ने हथकरघा आयुक्त भोपाल को भी शिकायत की थी।

कलाकारों ने बताया कि कुक्षी, जोबट, उज्जैन के भेरूगढ़ और सूरत जैसे शहरों में मशीन और स्क्रीन प्रिंट के माध्यम से बड़े पैमाने पर नकली बाग प्रिंट तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें बाजार में कम दामों पर बेचा जा रहा है। जबकि असली बाग प्रिंट को पारंपरिक विधि से तैयार करने में लगभग एक माह का समय लगता है, जिसमें कपड़े की धुलाई, प्राकृतिक रंगाई और ठप्पा छपाई शामिल है। इसके विपरीत स्क्रीन प्रिंटिंग से एक घंटे में 25 से 30 पीस और मशीन से एक घंटे में 100 पीस तक तैयार कर लिए जाते हैं। इससे असली कलाकारों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

कलाकारों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा बाग प्रिंट को प्राकृतिक रंग और ठप्पा छपाई के कारण जीआई टैग प्रदान किया गया है। नकली उत्पादों का निर्माण और विक्रय इस जीआई टैग का सीधा उल्लंघन है।

ज्ञापन में कुक्षी के इकबाल जमालुद्दीन, इदरीस, यूसुफ, बिलाल, अब्दुल रऊफ, फारुख, सुलेमान खत्री तथा जोबट के सजाउद्दीन इदरीस और फारुख खत्री पर नकली बाग प्रिंट उत्पाद बनाने का आरोप लगाया गया है और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्र ने कलाकारों को सुझाव दिया कि वे अपने मूल बाग प्रिंट उत्पादों पर ब्रांड का टैग लगाएं और उसका प्रचार करें, जिससे उपभोक्ताओं को असली और नकली उत्पादों में अंतर समझने में आसानी होगी।

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