रायपुर , फरवरी 13 -- छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रयोग से पुलिस प्रक्रिया तीव्र एवं आसान हुयी है।
श्री शर्मा आज गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों के संबंध में नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार बनने के साथ ही हम एक नई सोच को लेकर कार्य कर रहे हैं। राज्य की क्षमता में विस्तार के लिए नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन अंतर्गत आईसीजेएस के तहत पांचों स्तंभ-पुलिस, अभियोजन, फॉरेंसिक, जेल एवं न्यायालय-को एकीकृत करने की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी है।
दुर्ग एवं बिलासपुर जिले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांचों पिलर्स को एकीकृत कर एक मॉडल जिले के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पहले पुलिस को साक्ष्यों को लेकर कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता था, अब ई-साक्ष्य के आने से तुरंत साक्ष्य उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि पुलिस कार्यों के आधुनिकीकरण के लिए सीसीटीएनएस द्वारा मेडलीपार, ई-साक्ष्य, ई-समन, ऑनलाइन एफआईआर, ई-साइन, ई-कोर्ट, ई-श्रुति के माध्यम से कार्यों को त्वरित और आसान बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय प्राप्ति में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के लिए अब तक किसी प्रकार की बीमा व्यवस्था नहीं थी। इस पर ध्यान देते हुए सरकार द्वारा आठ बैंकों के साथ एमओयू कर बिना किसी प्रीमियम के सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ पुलिस के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्राप्त हो रहा है। यह पुलिस कर्मियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके तहत अब तक 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि पहले अपराध समीक्षा हाथ से लिखकर उपलब्ध कराई जाती थी, जिससे पुलिस विवेचना में देरी होती थी। अब राज्य की अभिनव पहल के रूप में अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से पूरे राज्य में दर्ज एफआईआर की निगरानी, समीक्षा एवं विश्लेषण किया जा रहा है। समय-सीमा में अपराधों की विवेचना के साथ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित पर्यवेक्षण किया जा रहा है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है और हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निराकरण हेतु ऑनलाइन कम्प्लेंट मैनेजमेंट पोर्टल का निर्माण किया गया है। पूर्व में शिकायतों को संबंधित जिलों में डाक के माध्यम से भेजा जाता था और जांच प्रतिवेदन भी डाक से ही मुख्यालय को प्राप्त होता था। इस पोर्टल के निर्माण से प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है, जिससे संसाधनों व समय की बचत के साथ शिकायतों का त्वरित निराकरण हो रहा है। इससे पुलिस की छवि में सुधार तथा पीड़ितों को राहत मिल रही है।
उप मुख्यमंत्री ने अवैध प्रवासियों पर सख्त रुख अपनाते हुए बताया कि राज्य में टोल फ्री नंबर जारी कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। विशेष टास्क फोर्स का गठन कर विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 34 लोगों को देश से निष्कासित किया गया है। विचाराधीन व्यक्तियों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। सरकार द्वारा एंटी टेररिस्ट स्क्वाड को भी सक्रिय किया गया है। वर्ष 2025 में इसके द्वारा पहली बार कार्रवाई की गई।
उन्होंने बताया कि धर्मांतरण के मामलों पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। सरकार बनने के 23 वर्षों में जितने मामले दर्ज हुए थे, उससे दोगुने मामले पिछले दो वर्षों में दर्ज किए गए हैं।
प्रदेश में गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार की रोकथाम हेतु पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। 142 वाहनों को राजसात कर 27 वाहनों की नीलामी की जा चुकी है। देश में पहली बार गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार के आदतन आरोपियों की सूची बनाई गई है और उन पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 19 पर निगरानी खोली गई है।
नशे के व्यापार के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए आदतन आरोपियों की संपत्ति जब्त कर नीलामी की जा रही है। गांजा, नशीली दवाइयों, एमडीएमए, हेरोइन, ब्राउन शुगर एवं डोडा का नष्टीकरण किया गया है तथा वाहनों की नीलामी भी की जा रही है।
साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के खातों को सीज किया गया है। फर्जी सिम जारी करने वाले पीओएस पर अपराध दर्ज कर 165 संचालकों की गिरफ्तारी की गई है। म्यूल खातों पर कार्रवाई करते हुए बैंक कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी की गई है।
अनाधिकृत ऑनलाइन गैम्बलिंग प्लेटफॉर्म पर पहली बार कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक्स और पोर्टल्स को रोका गया है। रायगढ़, कोरबा, राजनांदगांव, कबीरधाम, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, जशपुर एवं धमतरी में साइबर थानों का संचालन प्रारंभ किया गया है।
उन्होंने नक्सलवाद के अंत के संबंध में कहा कि शासन बस्तर में शांति के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च 2026 की समय-सीमा पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार अडिग है। शासन का प्रयास अधिक से अधिक माओवादियों का पुनर्वास कराना है। पुनर्वासित नक्सलियों को आजीविका प्रशिक्षण, शासन की योजनाओं का लाभ, 5जी मोबाइल फोन एवं शैक्षणिक भ्रमण की सुविधा दी जा रही है। इलवद पंचायत योजना के तहत दो पंचायतों ने स्वयं को नक्सल मुक्त घोषित किया है।
जेलों में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के तहत चार केंद्रीय जेल-रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं अंबिकापुर-को आईएसओ प्रमाणन प्राप्त हुआ है। केंद्रीय जेल अंबिकापुर में सरगुजा स्कूल ऑफ आर्ट्स की स्थापना की गई है। केंद्रीय जेल रायपुर में 'उमंग-तरंग' रेडियो स्टेशन संचालित किया जा रहा है। मसाला उद्योग, ऑयल एक्सट्रेक्शन, एलईडी बल्ब निर्माण एवं पेट्रोल पंप जैसे उद्योगों के माध्यम से बंदियों के कौशल विकास एवं पुनर्वास का कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर एसीएस गृह मनोज पिंगुआ, डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, सचिव हिमशिखर गुप्ता, एडीजी अमित कुमार, एडीजी एसआरपी कल्लूरी, एडीजी विवेकानंद, एडीजी प्रदीप गुप्ता, आईजी ध्रुव गुप्ता एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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