चेन्नई , अक्टूबर 09 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़े 100 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में गवाही रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की मांग को एक सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी की याचिका पर भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को 29 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने के शुक्रवार को निर्देश दिये।
सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार ने न्यायालय द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर जयश्री के सामने धोनी की गवाही रिकॉर्ड किये जाने के मामले में न्यायालय में तीन अंतरिम आवेदन दायर किये हैं। उन्होंने कार्यवाही की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति की भी मांग की और इस बात पर बल दिया कि गवाहों के पूरे बयान की विडियो रिकॉर्डिंग की जाये। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि फुटेज की प्रतियां दोनों पक्षों और न्यायिक अधिकारी को उपलब्ध करायी जायें।
श्री संपत कुमार ने आगे तर्क दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि धोनी एक मशहूर क्रिकेटर हैं, उनकी गवाही किसी फाइव-स्टार होटल या निजी बंगले के बजाय न्यायालय परिसर या सरकारी इमारत में ही दर्ज की जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदार के सामने यह मामला सुनवाई के लिए आया, तो धोनी के वकील ने जगह तय करने की मांग का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि किसी खास जगह पर उनकी गवाही रिकॉर्ड करने से फैंस की भारी भीड़ जमा हो सकती है और कानून-व्यवस्था की अनावश्यक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
न्यायालय ने ने कहा कि वह तुरंत यह तय करने की स्थिति में नहीं है कि गवाही कहां दर्ज की जानी चाहिए और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर तक के लिए टाल दी।
पिछली सुनवाई 17 सितंबर को हुई थी जिस दौरान न्यायालय ने धोनी को निर्देश दिया था कि वह श्री संपत कुमार की याचिका का जवाब आज तक दें। श्री कुमार ने मानहानि के मुकदमे में पूर्व भारतीय कप्तान के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की थी।
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