नयी दिल्ली , जून 11 -- मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने गुरुवार को यहां नीति आयोग की 11वीं शासकीय परिषद की बैठक में जातीय संघर्ष से धीरे-धीरे हो रही शांति की ओर लौट रही राज्य की स्थिति का उल्लेख किया और पुनर्वास, सीमा सुरक्षा, बुनियादी ढांचे तथा आर्थिक विकास के लिए केंद्र से और अधिक मदद की मांग की।
यह जानकारी राज्य के सूचना अधिकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का विषय 'विकसित भारत-2047 के लिए समावेशी मानव विकास' था और इसमें केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
श्री सिंह ने मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने परिषद को बताया कि एक खास पुनर्वास पैकेज के तहत आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) को चरणबद्ध तरीके से फिर से बसाने का काम चल रहा है। केंद्र की मदद से लगभग 11,000 विस्थापित परिवारों को पहले ही फिर से बसाया जा चुका है, जबकि बाकी परिवारों के पुनर्वास के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 5,000 अतिरिक्त घरों को मंज़ूरी देने के लिए केंद्र का आभार जताया और पुनर्वास के प्रयासों को तेज़ करने के लिए और मदद की अपील की। श्री सिंह ने कहा कि चार फरवरीको पद संभालने के बाद से उनकी सरकार ने शांति बहाल करने और हिंसा से प्रभावित समुदायों के बीच भरोसा फिर से कायम करने पर ध्यान दिया है। उन्होंने जिरीबाम और इंफाल में राहत शिविरों के अपने दौरों, सेनापति, कांगपोकपी और उखरुल ज़िलों में समुदायों के साथ बातचीत और कांगपोकपी और चुराचांदपुर के विस्थापित लोगों के साथ आभासी माध्यम से हुई बैठकों का ज़िक्र किया।
जिरीबाम को शांति-निर्माण के लिए एक मॉडल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ज़िला मेल-मिलाप का प्रतीक बन गया है, जहाँ मैतेई, कुकी, पाइते और हमार समुदायों के लोग शांति से इकट्ठा होते हैं और साथ मिलकर खाना खाते हैं। उन्होंने बताया कि जिरीबाम के कुछ विस्थापित निवासी पहले ही अपने घरों को लौटना शुरू कर चुके हैं और उम्मीद जताई कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही पहल की जा सकती है। उन्होंने पड़ोसी देश म्यांमार में चल रही स्थिति से पैदा होने वाली चुनौतियों पर भी चिंता जताई और मज़बूत सीमा प्रबंधन, बेहतर निगरानी और ड्रग्स, हथियारों और इंसानों की तस्करी के ख़िलाफ़ मिलकर कार्रवाई करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने परिषद को बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर 50 किलोमीटर की फेंसिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी 80 किलोमीटर पर काम चल रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए श्री सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री हक्शेलगी तेंगबांग योजना के तहत 1.4 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को 181 करोड़ रुपये से ज़्यादा का मुफ़्त इलाज मिला है। उन्होंने दावा किया कि मणिपुर में अब देश में सबसे कम शिशु मृत्यु दर है। वहीं, उच्च शिक्षा में मणिपुर का सकल नामांकन अनुपात 35.5 प्रतिशत है, जो 28.4 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से काफ़ी ज़्यादा है। उन्होंने प्रस्तावित राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार पार्क और बड़े शैक्षणिक केंद्र पहल में राज्य को शामिल करने की मांग की और राज्य में विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को जोड़ने वाला एक क्षेत्रीय नोड बनाने का अनुरोध किया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित