नैनीताल , जुलाई 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों द्वारा ले जाए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मामले में याचिकाकर्ता को प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को प्रत्यावेदन सौंपने को कहा है।

अदालत ने मुख्य सचिव को प्रत्यावेदन पर नियमानुसार विचार करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही इस प्रकरण को प्लास्टिक कचरा से संबंधित अन्य मामले के साथ सुनवाई के लिए संबद्ध कर दिया है।

इस प्रकरण की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में हुई। समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉ. आशुतोष पंत ने इस मामले को चुनौती देते हुए कहा कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों, बुग्यालों और ग्लेशियरों की सैर पर जाने वाले पर्यटक एवं श्रद्धालु अपने साथ डिब्बा बंद और प्लास्टिक पैक में बंद खाद्य सामग्री, पानी की बोतलें और अन्य सामान ले जा रहे हैं।

इससे जंगलों, धार्मिक स्थलों, ग्लेशियरों के साथ ही नदियों और नालों में प्लास्टिक कचरा जमा हो रहा है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। याचिका में धार्मिक स्थलों पर भंडारा कराने वाले लोगों तथा बुग्यालों में जाने वाले पर्यटकों और ट्रैकर्स की निगरानी के लिए अधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से जनहित याचिका में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यात्री और ट्रैकर अपने साथ ले जाने वाली पानी की बोतलें और खाने-पीने की सामग्री के खाली वापस लेकर आएं। ऐसा नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का सुझाव दिया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से भंडारे, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में प्लास्टिक के गिलास, प्लेट, बोतल और अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे आयोजन कराने वाली संस्थाओं से प्लास्टिक का प्रयोग न करने और अंत में कूड़ा कचरा साफ कराने की शर्त वाला बांड भरवाया जाए। ऐसा नहीं करने पर संबंधित संस्था पर जुर्माना के साथ ही कार्रवाई की जाए और जुर्माने की राशि का उपयोग कचरा हटाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में उपयोग में लाई जाये।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित