अमृतसर , अगस्त 24 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने कांग्रेस सांसद डॉ धर्मवीर गांधी द्वारा लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़े कार्यक्रमों को 'आडंबर' बताये जाने की कड़ी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सनातन और सिख धर्म विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आया है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म विरोधी होना नहीं है।
प्रो.ख्याला ने सोमवार को कहा कि यदि डॉ. गांधी धार्मिक यात्राओं और धार्मिक कार्यों पर सरकारी धन खर्च किये जाने को संविधान का उल्लंघन या सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला मानते हैं, तो उन्हें कांग्रेस की पिछली केंद्र सरकारों की उन नीतियों पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, जिनके तहत कई दशकों तक मुस्लिम समुदाय को हज यात्रा के लिए सब्सिडी दी जाती रही।
उन्होंने कहा कि एक ही मापदंड हर धर्म और हर सरकार पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार को भी धार्मिक यात्रा योजनाओं को अपनी सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने से आगाह किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं के आयोजन से पंजाब की बुनियादी समस्याओं पर सरकार की विफलताओं को छिपाया नहीं जा सकता।
भाजपा नेता ने कहा कि लोगों का पैसा मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाना चाहिए, यह सिद्धांत रूप से विचारणीय बात है। पंजाब पर भारी कर्ज का बोझ है और उसकी अर्थव्यवस्था दबाव में है। कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया को लेकर सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर धार्मिक यात्रा योजनाओं से जुड़े प्रचार और विज्ञापन पर बड़े खर्च की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब आज भी नशे, बेरोजगारी, गैंगस्टरवाद और कानून-व्यवस्था जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है। सरकार को अस्पतालों, स्कूलों, रोजगार, नशामुक्ति, कृषि और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए। धार्मिक यात्राएं आस्था का विषय हैं, लेकिन वे सुशासन का विकल्प नहीं बन सकतीं।
प्रो. ख्याला ने कहा कि केवल सरकार की छवि चमकाने के लिए सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। भाजपा सरकारी खजाने के किसी भी अनियमित या फिजूल इस्तेमाल के पक्ष में नहीं है। बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए मुफ्त धार्मिक यात्राओं की सरकारी योजनाओं को अपने आप में गलत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं में पूरी पारदर्शिता, स्पष्ट पात्रता मानदंड, खर्च का सही हिसाब-किताब, लाभार्थियों का पूरा विवरण और सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को धार्मिक स्थलों के दर्शन करवाना सम्मानजनक और जनकल्याणकारी पहल है, लेकिन इसकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि प्रबंधन की खामियों के कारण बसें खाली या बहुत कम यात्रियों के साथ जा रही हैं, तो महंगी योजना के बावजूद उसका अपेक्षित लाभ लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच रहा। इससे सार्वजनिक धन के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
प्रो. ख्याला ने मांग की कि सरकार धार्मिक यात्रा योजनाओं पर किए जा रहे सभी खर्चों का पूरा हिसाब-किताब जनता के सामने रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के हर रुपये के प्रति जवाबदेही अनिवार्य है।
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