बैतूल , जनवरी 15 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के भैंसदेही तहसील की ग्राम पंचायत धाबा में आदिवासी एवं दलित बच्चों के लिए निर्मित स्कूल भवन को जिला प्रशासन द्वारा बुलडोजर से तोड़े जाने की कार्रवाई पर श्रमिक आदिवासी संगठन और समाजवादी जन परिषद (सजप) ने कड़ा रोष जताया है। संगठनों ने इसे शिक्षा विरोधी और पक्षपातपूर्ण कदम बताया है।
संगठनों का कहना है कि नईम भाई द्वारा अपनी निजी जमीन पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत से यह स्कूल भवन बनाया गया था, ताकि गांव के वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा मिल सके। आरोप लगाया गया कि भवन को केवल इस आधार पर मदरसा बताकर तोड़ा गया, क्योंकि इसका निर्माण एक मुस्लिम व्यक्ति ने कराया था, जो पूरी तरह गलत है।
सजप के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेन्द्र गढ़वाल ने कहा कि जहां सरकार की लगातार मांग के बावजूद दानवाखेड़ा, भंडारपानी जैसे गांवों में स्कूल नहीं खुल पा रहे हैं, वहीं कोई व्यक्ति निजी संसाधनों से स्कूल बना रहा है तो उसे अवैध बताकर ढहाया जा रहा है।
सजप के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं आदिवासी नेता फागराम सेलू ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि आदिवासी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा मिले। हरदा जिले के पूर्व जनपद सदस्य रामदीन टेकाम ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो इस कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरेंगे।
अनुराग मोदी ने बताया कि पंचायत ने 11 जनवरी 2026 को नोटिस दिया और 12 जनवरी को ही भवन तोड़ दिया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।
संगठनों ने स्मरण कराया कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 के निर्णय में स्पष्ट किया है कि किसी भी ध्वस्तीकरण से पूर्व विधिवत शो-कॉज नोटिस, सुनवाई और अपील का अवसर अनिवार्य है।
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