भुवनेश्वर , अगस्त 30 -- ओडिशा में विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने धान खरीद के लिए किसानों को दिये गये पंजीकरण के समय को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि पड़ोसी छत्तीसगढ़ में किसानों को पंजीकरण के लिए चार महीने का समय दिया जा रहा है, जबकि ओडिशा में किसानों को केवल एक महीने की मोहलत मिली है।

बीजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष संजय दासबर्मा ने इस अंतर को "अस्वीकार्य" बताते हुए ओडिशा में पंजीकरण की अंतिम तारीख को 20 सितंबर तक बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के किसानों को मौजूदा समयसीमा के कारण खास तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

श्री दासबर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि किसान पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और कुप्रबंधन हुआ है। उनका दावा है कि इस साल पंजीकरण की प्रक्रिया निर्धारित समय से 18 दिन देरी से शुरू हुई।

श्री दासबर्मा के मुताबिक, भारी बारिश और बाढ़ से ओडिशा के 20 जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई नदियों में बार-बार आई बाढ़ से फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले साल धान खरीद के लिए करीब 23 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था, जबकि इस साल अब तक केवल करीब 17 लाख किसान ही प्रक्रिया पूरी कर पाए हैं। इस हिसाब से साढ़े चार लाख से ज्यादा किसान अभी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से बाहर हैं।

बीजद ने बटाईदार किसानों के पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया है। श्री दासबर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने बटाईदारों के लिए अलग ऐप शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह सुविधा अब तक चालू नहीं हुई है। मौजूदा व्यवस्था के कारण कई किसान रजिस्ट्रेशन और ई-KYC की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीन मालिकों को ई-केवाईसी के लिए सहकारी समितियों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ रहा है, लेकिन इसके अनुरूप सॉफ्टवेयर में जरूरी बदलाव नहीं किये गये। वहीं जिन बटाईदारों का पंजीकरण हो चुका है, उनमें भी इस बात को लेकर असमंजस है कि वे अपना धान किस प्रक्रिया के तहत बेच पाएंगे।

बीजद नेता ने दावा किया कि राज्यभर में किसान रजिस्ट्रेशन, टोकन व्यवस्था, मंडियों की व्यवस्था, मिलों से जुड़ी समस्याओं और भुगतान में देरी जैसे मुद्दों को लेकर परेशान हैं और कई जगह विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं। श्री दासबर्मा ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने इन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया तो किसान सरकार को "करारा जवाब" देंगे।

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