रायपुर , जनवरी 14 -- छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर धान खरीदी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और किसानों की बढ़ती हताशा को लेकर आगाह किया है।

श्री महंत ने बुधवार को कहा कि विधानसभा चुनाव में "मोदी की गारंटी" देने वाली सरकार आज अन्नदाता को उसकी उपज का वाजिब दाम और सम्मान दिलाने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके चलते प्रदेश के कई इलाकों में किसान आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि 'धान का कटोरा' कहलाने वाले इस राज्य में आज किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है। कोरबा और बागबाहरा जैसे इलाकों में किसानों का आत्महत्या के लिए मजबूर होना साबित करता है कि प्रदेश में सुशासन पूरी तरह दम तोड़ चुका है।" उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने चुनाव से पहले 3100 रुपये प्रति क्विंटल और 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का वादा किया था लेकिन जमीन पर इसका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि 'टोकन तुंहर हाथ' ऐप और बायोमेट्रिक सर्वर जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं बार-बार फेल हो रही हैं, जिसके कारण किसानों को टोकन जारी करने में भारी देरी हो रही है। सोसायटियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं और किसानों को 'आज नहीं कल आना' कहकर लौटा दिया जाता है। ई-केवाईसी की जटिल प्रक्रिया और अब ऑनलाइन खरीदी बंद होने से हजारों किसान अब तक अपना धान नहीं बेच पाए हैं। 31 जनवरी को खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आने से उनमें यह डर बैठ गया है कि उनकी फसल खेतों में ही सड़ जाएगी।

डॉ. महंत ने बागबाहरा के किसान मनबोध गाड़ा, कोरबा के सुमेर सिंह और हरदी बाजार के बैसाखु मरकाम जैसे उदाहरण दिए, जो हताशा में आत्मघाती कदम उठाने को विवश हुए। उन्होंने तत्काल तीन मांगें रखीं हैं जिनमें आत्महत्या का प्रयास करने वाले किसानों को तुरंत आर्थिक सहायता, धान खरीदी की समय सीमा एक माह बढ़ाना और तकनीकी कारणों से फंसे धान की ऑफलाइन टोकन जारी कर तुरंत खरीदी सुनिश्चित करना है।

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