एमसीबी , फरवरी 23 -- छत्तीसगढ़ में एमसीबी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद अब उठाव कार्य ने तेजी पकड़ ली है। प्रशासन की सक्रिय कार्यशैली, सतत मॉनिटरिंग और मिलर्स तथा परिवहन एजेंसियों के बेहतर समन्वय से यह संभव हो पाया है। जिले के 25 उपार्जन केंद्रों पर खरीदे गए धान का परिवहन सुचारू रूप से जारी है।
जिला पीआरओ से सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार जिले में अब तक कुल आठ लाख 79 हजार 848.6 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इसमें से चार लाख 82 हजार 860 क्विंटल धान का सफल उठाव कर लिया गया है। यह उपलब्धि प्रशासनिक दक्षता और धान प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था को दर्शाती है। तेज उठाव से उपार्जन केंद्रों और सोसायटी परिसरों में भंडारण का दबाव कम हो रहा है। इससे केंद्रों पर व्यवस्था बेहतर बनी हुई है और आगामी खरीद के लिए स्थान भी खाली हो रहा है।
जिले के विभिन्न केंद्रों से उठाव के आंकड़े सकारात्मक रहे हैं। केल्हारी केंद्र से सर्वाधिक 39,380 क्विंटल धान का परिवहन किया गया। कौड़ीमार से 38,260 क्विंटल, बरबसपुर से 31,290 क्विंटल, चैनपुर से 30,860 क्विंटल, डोडकी से 30,530 क्विंटल तथा बरदर से 30,210 क्विंटल धान उठाव दर्ज किया गया। कोड़ा केंद्र से 27,810 क्विंटल, नागपुर से 24,040 क्विंटल, घुटरा से 23,620 क्विंटल, कठौतिया से 23,600 क्विंटल, कुवांरपुर से 23,160 क्विंटल, बंजी से 23,120 क्विंटल तथा खड़गवां से 20,930 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है।
प्रशासनिक अधिकारी नियमित निरीक्षण और समीक्षा बैठकों के जरिए प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। परिवहन एजेंसियों को समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं और मिलर्स के साथ समन्वय बनाकर चरणबद्ध तरीके से धान उठाव सुनिश्चित किया जा रहा है। इस रणनीति का सकारात्मक असर किसानों को समय पर भुगतान के रूप में भी मिल रहा है। किसानों को अब अपनी उपज का भुगतान समय पर मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिले में अभी तीन लाख 96 हजार 988.6 क्विंटल धान का उठाव शेष है। प्रशासन ने इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है। दैनिक प्रगति की समीक्षा कर कमियों को तुरंत दूर किया जा रहा है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी स्तर पर लापरवाही न हो और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। पारदर्शी प्रक्रिया और प्रशासनिक तत्परता के कारण जिले में धान खरीदी एवं उठाव की व्यवस्था एक मॉडल के रूप में उभर रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
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