रायपुर , मार्च 03 -- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और अंतर राशि को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा सोशल मीडिया पर कुछ कांग्रेस नेताओं और उनके परिजनों को धान बिक्री पर हुए भुगतान का विवरण साझा करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इसे "स्तरहीन राजनीति" करार दिया है, तो वहीं भाजपा नेताओं ने पलटवार करते हुए पिछली सरकार के वादों की याद दिलाई है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा की पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के नेता किसान हैं और उन्होंने धान बेचा है, तो उन्हें उनकी उपज का मूल्य मिलना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा, "यह कोई खैरात नहीं, बल्कि हमारे खून-पसीने की कमाई है। भाजपा अनावश्यक रूप से व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक कर रही है।"बैज ने भाजपा नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि साहस है तो विष्णुदेव साय, किरण देव, रमन सिंह, अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक सहित अन्य भाजपा नेताओं को धान बिक्री पर मिला भुगतान भी सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने करीब 7 लाख किसानों का धान नहीं खरीदा और बड़ी संख्या में किसानों से रकबा सरेंडर करवाया। साथ ही दावा किया कि अंतर राशि में लगभग 2600 करोड़ रुपये कम दिए गए हैं।
धान खरीदी में "अंतर राशि" उस रकम को कहा जाता है, जो केंद्र द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और राज्य सरकार द्वारा घोषित प्रति क्विंटल दर के बीच का अंतर होती है।
कांग्रेस का तर्क है कि पिछले दो वर्षों में समर्थन मूल्य में कुल 206 रुपये की वृद्धि हुई है। ऐसे में अंतर राशि की गणना 3100 रुपये की घोषित दर के बजाय बढ़े हुए आधार (करीब 3286 रुपये) पर होनी चाहिए।
श्री बैज के अनुसार, 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी के हिसाब से लगभग 186 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर बनता है, जिससे किसानों को करीब 3906 रुपये प्रति एकड़ कम मिल रहे हैं। उनका दावा है कि 141 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के आधार पर लगभग 2622 करोड़ रुपये किसानों को कम दिए गए।
भूपेश बघेल ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि किसी की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, "हमने मेहनत की और अपना हक पाया है। इसमें किसी का एहसान नहीं है।"श्री बघेल ने पूर्ववर्ती सरकारों का हवाला देते हुए कहा कि रमन सिंह के कार्यकाल में शुरुआत में 10 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी होती थी, जिसे आंदोलन के बाद 15 क्विंटल किया गया। उनकी सरकार ने इसे बढ़ाकर 20 क्विंटल तक पहुंचाया।
उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी सरकार होती तो किसानों को 3400-3500 रुपये प्रति क्विंटल मिलते। साथ ही सवाल उठाया कि यदि "मोदी की गारंटी" के तहत मध्यप्रदेश और ओडिशा में 3100 रुपये दिए जा सकते हैं, तो छत्तीसगढ़ में कम दर क्यों?उधर, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जो दल स्वयं किसानों से किए वादे पूरे नहीं कर पाया, उसे आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने दो वर्षों का बोनस देने का वादा किया था, जो अधूरा रह गया। वर्तमान सरकार ने 'कृषक उन्नत योजना' के तहत घोषित राशि धान खरीदी के बाद एकमुश्त किसानों के खातों में जमा कराई है।
इधर, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी पलटवार करते हुए कहा कि भूपेश बघेल बड़े किसान हैं, इसलिए उन्हें अधिक लाभ मिला, जबकि छोटे किसानों को सीमित फायदा हुआ।
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