भुवनेश्वर , अक्टूबर 05 -- भारतीय जनता पार्टी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को ओड़िशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक से उनके कथित रूप से बॉक्साइट के रूपांतरण कारक को घटाने के प्रयासों को लेकर सवाल किया और पूछा कि पिछली बीजू जनता दल सरकार ने किसी खास निजी कंपनी को अनावश्यक लाभ देने की कोशिश क्यों की थी।
बॉक्साइट आपूर्ति और एमएमडीआर अधिनियम से जुड़े एक मामले में ओडिशा उच्च न्यायालय के हालिया फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, श्री प्रधान ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि पिछली बीजद सरकार ने राज्य के वित्तीय हितों को नज़रअंदाज़ करके निजी कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाने का रास्ता बनाया था।
श्री प्रधान ने कहा कि उच्च न्यायालय ने एक निजी औद्योगिक कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 15 करोड़ टन बॉक्साइट आपूर्ति की मांग की थी। कंपनी का दावा था कि बीजद सरकार ने 2004 में इसका भरोसा दिलाया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े पुराने वादे मौजूदा कानूनों से ऊपर नहीं हो सकते।
उन्होंने कहा कि खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर) के प्रावधानों और खनिज संरक्षण एवं विकास नियम, 2016 के नियम 45 में संशोधन के बाद बॉक्साइट के औसत बिक्री मूल्य पर एक रूपांतरण कारक लागू किया गया। उन्होंने दावा किया कि इसके परिणामस्वरूप बॉक्साइट की कीमत 750 रुपये से बढ़कर 1,707 रुपये प्रति टन हो गई।
श्री प्रधान के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से ओडिशा खनन निगम (ओएमसी) को लाभ हुआ और रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) तथा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) के तहत मिलने वाले राजस्व के माध्यम से राज्य को हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती थी।
श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक फरवरी 2020 (पत्र संख्या 1044) और सात अक्टूबर 2020 (पत्र संख्या 8569/एसएम) को केंद्र सरकार को अलग-अलग पत्र लिखकर रूपांतरण कारक को कम करने और निजी कंपनी द्वारा मांगी गई न्यूनतम कीमत लागू करने का अनुरोध किया था।
श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया था। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे नियम की समीक्षा की मांग करने के पीछे क्या तर्क था जो उनके अनुसार ओडिशा के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी था।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या किसी खास निजी कंपनी से लगभग 5,400 करोड़ रुपये का लंबे समय से बकाया पिछली सरकार के किसी गलत फैसले का नतीजा था। श्री प्रधान ने आरोप लगाया कि इस मामले से यह सवाल उठता है कि क्या किसी निजी कंपनी को अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए राज्य के हितों से समझौता किया गया था, और उन्होंने श्री पटनायक से इस पर सफाई मांगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित