रायपुर , अगस्त 17 -- योग गुरु बाबा रामदेव ने धर्मांतरण और धार्मिक भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर कहा है कि सनातन संस्कृति और धर्म अत्यंत प्राचीन है और इसमें ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके कारण किसी को मुस्लिम या ईसाई बनने की आवश्यकता पड़े। उन्होंने धार्मिक विवादों से ऊपर उठकर शिक्षा, चिकित्सा, कृषि और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के लिए इन व्यवस्थाओं का उन्नत होना आवश्यक है।

बाबा रामदेव ने आज राजधानी रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सनातन धर्म में कुछ ऐसे लोग जरूर हैं, जिनकी सोच में ऊंच-नीच और भेदभाव है, लेकिन इसे सनातन धर्म की कमी नहीं माना जा सकता। लोगों को अपने जीवन में धर्म को धारण करना चाहिए। भगवान राम, कृष्ण, हनुमान और शिव के आदर्शों को जीवन में उतारने से धर्मांतरण का सवाल ही नहीं उठेगा।

उन्होंने धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि इतिहास में कुछ मुगल आए और लूटकर चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अपने ही सनातनी भाइयों को लालच, तलवार, चमत्कार और भ्रांतियां फैलाकर धर्म बदलने के लिए मजबूर किया। ईसाई धर्म में भी लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया, लेकिन समाज चुप रहा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में कोई न्यूनता या अल्पता नहीं है। उनके मुताबिक, इस्लाम और ईसाइयत में भी कमियां हैं, लेकिन सनातन धर्म श्रेष्ठ है।

बाबा रामदेव ने कहा कि सत्ता तंत्र को धर्म तंत्र को मजबूत बनाने में सहयोग करना चाहिए, ताकि किसी तरह का षड्यंत्र न हो। उन्होंने धर्म, शिक्षा, चिकित्सा, अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए और व्यवस्थाओं को लगातार उन्नत बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। तभी 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।

महबूबा मुफ्ती के 'दिमागी नक्सली हूं' वाले बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में बाबा रामदेव ने कहा कि वह राजनीतिक बयानों के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बौद्धिक दृष्टि से वितंडा और अराजकता फैलाने का प्रयास करते हैं। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन इस आजादी का इस्तेमाल देश की बर्बादी के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने बौद्धिक अराजकता को ठीक नहीं बताया।

छत्तीसगढ़ में ईसाइयों को प्रताड़ित किए जाने संबंधी कांग्रेस के आरोपों पर बाबा रामदेव ने कहा कि कोई हिंदुओं पर ईसाइयों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाता है और कोई कहता है कि ईसाइयों को प्रताड़ित किया जा रहा है, यह राजनीतिक वितंडा है। उन्होंने कहा कि वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते। देश में कुछ धार्मिक और मजहबी परिवर्तन पहले हो चुके हैं, लेकिन आगे किसी भी व्यक्ति को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि न हिंदू धर्म खतरे में है, न मुस्लिम और न ही ईसाई धर्म। देश को धार्मिक मुद्दों में उलझने के बजाय आर्थिक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत की अर्थव्यवस्था को श्रेष्ठ बनाने पर फोकस होना चाहिए और भारत का रुपया डॉलर के बराबर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका, चीन और रूस के बराबर सम्मान और दर्जा मिलना चाहिए।

पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार से जुड़े सवाल पर बाबा रामदेव ने कहा कि इन देशों में हिंदुओं के साथ ज्यादतियां हुई हैं। उन्होंने इसे मानव सभ्यता की सबसे बड़ी क्रूरताओं में शामिल कृत्य बताया।

भारत और पड़ोसी देशों के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि वह दिन भी आएगा जब बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत एक साथ होंगे। इसके लिए उन्होंने लोगों से थोड़ा सब्र रखने की बात कही।

बाबा रामदेव ने कहा कि देश को धार्मिक विवादों से ऊपर उठकर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। देश की प्रगति और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इन सभी क्षेत्रों का मजबूत होना जरूरी है।

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