रांची , अगस्त 19 -- झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने आज कहा कि झारखंड बीजेपी एक बार पुनः बेरोजगार हो गई।

श्री शांति ने यहां कहा कि धर्म, जाति, घुसपैठ,छात्र आंदोलन जैसे मुद्दे झारखंड में हाथ से फिसलने के बाद अब भाजपा नई दुकान की तलाश में निकल पड़ी है।भाजपा की राजनीतिक दुकानदारी छात्रों के आंदोलन के समापन के साथ ही बंद हो गई।

श्री शांति ने कहा कि छात्रों द्वारा आंदोलन के समापन की घोषणा को स्वागतयोग्य कदम बताया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र आंदोलन की समाप्ति से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू को सदमा पहुंचा है, सीबीआई जांच के बहाने सरकार को अस्थिर करने की उनकी मंशा पर तुषारापात हो गया।

आंदोलनकारी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और उनके आंदोलन को बदनाम करने, हाईजैक करने की पूरी कोशिश आदित्य साहू के नेतृत्व में भाजपाइयों ने की थी लेकिन छात्रों के संयम और संवेदनशीलता के चलते अपने कुत्सित चाल में भाजपा कामयाब नहीं हो सकी। आंदोलन के समापन के बाद भाजपा के हेड मास्टर ने जवाब तलब के लिए पूरी झारखंड बीजेपी टीम को दिल्ली तलब किया लेकिन अपने हेडमास्टर को आदित्य साहू जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा अपने शासनकाल में किसी परीक्षा में गड़बड़ी नहीं होने की बात कहना चोर की दाढ़ी में तिनका के समान है, यह भाजपा शासन के सच्चाई को उजागर करता है की निश्चित रूप से 2014 से 19 के बीच में कोई परीक्षा में भी व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई होगी। भाजपा शासित राज्यों से गुंडो की फौज बुलाकर झारखंड को अशांत करने की कोशिश को यहां की जनता भूल नहीं पाएगी।

एक तरफ जहां छात्र अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे थे वहीं दूसरी तरफ भाजपा उनकी लड़ाई को अपना राजनीतिक हथियार बनाकर राज्य में अशांति का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रही थी अपने भड़काऊ भाषणों,झूठे आश्वासनों के सहारे भाजपा ने हर संभव कोशिश की थी कि छात्रों का टकराव सरकार के साथ हो और भाजपा इसे अपना राजनीतिक मुद्दा पूरे देश में बना सके। झारखंडी संस्कृति के अनुसार संयमीत छात्रों ने पूरे देश में एक अलग मिसाल पेश की और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखा।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की भावनाओं और उनकी समस्याओं की तह तक जाकर परीक्षाओं को रद्द करने, सीआईडी जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन, सेवानिवृत्ति जज से मामले की जांच में सहित कई अन्य फैसले छात्र हित में लिए जिससे भाजपा की छात्रों के आंदोलन पर चलने वाली राजनीतिक दुकानदारी पर ताला लग गया।

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