नयी दिल्ली , जून 15 -- धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और अन्य से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान ले लिया है।

ईडी ने 27 मार्च को राउज एवेन्यू स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसमें पुनीत गर्ग और वैशाली माने को आरोपी बनाया गया है। इससे पहले आरकॉम के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को ईडी ने 29 जनवरी को गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। धन शोधन का यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की प्राथमिकी के आधार पर दर्ज किया गया था।

ईडी के अनुसार, पुनीत गर्ग वर्ष 2006 से 2013 तक आरकॉम के ग्लोबल एंटरप्राइज बिजनेस के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वर्ष 2014 से 2017 तक उन्होंने नियामक मामलों (रेगुलेटरी अफेयर्स) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। अक्टूबर 2017 में उन्हें कंपनी का कार्यकारी निदेशक बनाया गया और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक वह गैर-कार्यकारी निदेशक रहे। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2001 से 2025 के बीच आरकॉम में विभिन्न वरिष्ठ प्रबंधकीय और निदेशक पदों पर रहते हुए गर्ग कथित बैंक धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की आय को हासिल करने, अपने कब्जे में रखने, छिपाने, विभिन्न माध्यमों से स्थानांतरित करने और ठिकाने लगाने की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे।

ईडी के अनुसार, अपराध की आय को आरकॉम की कई विदेशी सहायक कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के जरिये इधर-उधर भेजा गया। इन धनराशियों का इस्तेमाल कथित तौर पर ब्रिटेन के जर्सी स्थित एक कंपनी के नाम पर पंजीकृत 'टीआईएएन' नामक लग्जरी यॉट और अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित मैनहट्टन में एक आलीशान कंडोमिनियम अपार्टमेंट खरीदने में किया गया।

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