बैतूल , जुलाई 11 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का धनोरा गांव पिछले 104 वर्षों से छोटे परिवार की परंपरा को निभाते हुए जनसंख्या संतुलन की अनूठी मिसाल बना हुआ है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार पिछले लगभग 15 वर्षों में गांव की आबादी में केवल 94 लोगों की वृद्धि दर्ज की गई है।

ग्राम पंचायत के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना में धनोरा की आबादी 1,687 थी, जो वर्तमान में बढ़कर 1,781 हो गई है। वहीं वर्ष 1961 में गांव की जनसंख्या 1,410 थी। इस प्रकार 50 वर्षों में आबादी में केवल 277 लोगों की वृद्धि हुई, जिसे ग्रामीण क्षेत्र के लिए असाधारण माना जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में अधिकांश दंपती स्वेच्छा से एक या दो बच्चों के बाद परिवार नियोजन अपना लेते हैं। लगभग 300 दंपतियों वाले इस गांव में छोटे परिवार की सोच पीढ़ी-दर-पीढ़ी सामाजिक परंपरा के रूप में चली आ रही है।

ग्रामीण धर्मराज धोटे ने बताया कि वर्ष 1922 में गांव में आयोजित कांग्रेस सम्मेलन के दौरान कस्तूरबा गांधी ने छोटे परिवार और खुशहाल जीवन का संदेश दिया था। ग्रामीणों ने इस संदेश को जीवन का हिस्सा बना लिया, जो समय के साथ गांव की सामाजिक संस्कृति बन गया।

स्थानीय स्तर पर 'कांग्रेस धनोरा' के नाम से प्रसिद्ध इस गांव में बेटा-बेटी के बीच भेदभाव भी नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 50 परिवार ऐसे हैं, जिनमें केवल एक बेटी होने के बावजूद दूसरा बच्चा नहीं किया गया। ग्रामीणों का मानना है कि छोटे परिवार से बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य उपलब्ध कराया जा सकता है।

ग्राम पंचायत सचिव विनायक पाटिल ने बताया कि गांव में पिछले लगभग एक शताब्दी से छोटे परिवार की परंपरा कायम है। अधिकांश परिवारों में एक या दो ही बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि धनोरा इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक जागरूकता और स्वैच्छिक सहभागिता से परिवार नियोजन को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है।

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