चेन्नई , मई 04 -- अपनी सुपरहिट फिल्मों की तरह, जिनमें वह एक हीरो के तौर पर दुश्मनों का सफाया करते हैं, अभिनेता विजय ने तमिलनाडु के चुनावी मैदान में धमाकेदार शुरुआत की है।
श्री विजय ने अपने पहले ही चुनाव में द्रविड़ राजनीति के उस मजबूत किले को ढहा दिया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने अकेले अपने दम पर तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) को शानदार जीत दिलाई है। उन्होंने न केवल सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को पछाड़ा, बल्कि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) जैसी सशक्त पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया।
श्री विजय की लोकप्रियता ने तमिलनाडु में पिछले 50 सालों से चले आ रहे दो द्रविड़ दलों के दबदबे को खत्म कर दिया है। इस चुनाव में द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को भी कोलाथुर सीट पर हार झेलनी पड़ी है। उनके साथ ही दिग्गज मंत्री दुरईमुरुगन समेत कई बड़े मंत्रियों को अपने ही गढ़ में शिकस्त मिली है। श्री स्टालिन को टीवीके उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने 9,000 से ज्यादा मतों से हराया है। कोलाथुर से लगातार तीन बार जीत चुके श्री स्टालिन की यह पहली हार है।
पहली बार चुनाव लड़ रही टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि वह बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के जादुई आंकड़े से थोड़ी पीछे रह गई है। साल 2024 में बनी इस पार्टी के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। श्री विजय ने खुद चेन्नई की पेरम्बूर और त्रिची पूर्व, दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है।
इस नतीजे ने एक बार फिर दिखा दिया कि तमिलनाडु में फिल्मों और राजनीति का रिश्ता कितना गहरा है। श्री विजय ने अपने करोड़ों प्रशंसकों को एक मजबूत वोट बैंक में बदल दिया। उन्होंने खुद को एक 'द्रविड़ विकल्प' के रूप में पेश किया और वह सफलता पाई जो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियां 1967 के बाद से कभी हासिल नहीं कर सकीं।
वर्ष 1974 में 22 जून को जन्मे श्री विजय ने अपने पिता और फिल्म निर्माता एस.ए. चंद्रशेखर की फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत की थी। 1992 में आई फिल्म 'नालैया थीरपू' से उन्हें असली पहचान मिली। शुरू में रोमांटिक फिल्में करने के बाद उन्होंने ऐसी फिल्में कीं जिनमें वे इंसाफ दिलाने वाले और आम जनता की आवाज उठाने वाले नायक बने।
राजनीति के लिए श्री विजय ने अपने चमकते फिल्मी करियर को दांव पर लगा दिया। उन्होंने साफ किया है कि 'जन नायकन' उनकी आखिरी फिल्म होगी। 51 साल की उम्र में वे अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं।
चुनाव के सफर में श्री विजय को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके एक कार्यक्रम में भगदड़ मचने से 41 लोगों की जान चली गई। उनकी आखिरी फिल्म 'जन नायकन' भी सेंसर बोर्ड के विवादों में फंसी रही। निजी जीवन में भी तनाव रहा, जब उनकी पत्नी संगीता ने अदालत में तलाक की अर्जी दी। उन पर एक अभिनेत्री के साथ संबंधों के आरोप भी लगे, जिसका मामला अभी कोर्ट में है।
इन तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद श्री विजय पीछे नहीं हटे। उन्होंने द्रमुक और अन्नाद्रमुक जैसी पुरानी पार्टियों को धूल चटा दी और खुद को एक मजबूत ताकत के रूप में साबित किया। श्री विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान ही कह दिया था कि द्रमुक उनकी राजनीतिक दुश्मन है और भाजपा उनकी वैचारिक विरोधी।
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