चेन्नई , अक्टूबर 17 -- द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के सांसदों की शनिवार को हुई बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग की गयी।

पार्टी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की कार्रवाइयों से चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। बैठक में सीईसी को हटाने की मांग को लेकर युवाओं के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने का भी संकल्प लिया गया।

पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि द्रमुक सांसद एसआईआर को रद्द करने और ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने की मांग को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन सौंपेंगे।

बैठक में पारित चार प्रस्तावों में से पहले में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर लागू करने में उनकी भूमिका की उचित जांच कराने की मांग की गयी। पार्टी ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिये गये हैं। उसने 2025 में बिहार में इस प्रक्रिया का विरोध करने के स्टालिन के रुख का भी उल्लेख किया। द्रमुक ने दो नवंबर, 2025 को आयोजित सर्वदलीय बैठक, इस प्रक्रिया के खिलाफ कानूनी चुनौती और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों का भी हवाला दिया।

दूसरे प्रस्ताव में एसआईआर रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर छात्रों और युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया गया। इसमें एक समाचार पत्र की उस रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें दावा किया गया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों से परामर्श किए बिना फैसले लिए थे।

पार्टी ने दिल्ली और चेन्नई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई की भी निंदा की। उसने पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, पिनराई विजयन, ममता बनर्जी और माणिक सरकार सहित विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों की श्री स्टालिन की ओर से की गयी आलोचना का भी उल्लेख किया।

द्रमुक ने कहा कि वह एसआईआर का विरोध करने वाले लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन करेगी, लेकिन कांग्रेस के साथ संयुक्त कार्रवाई नहीं करेगी। पार्टी ने कांग्रेस पर अपने सहयोगियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

द्रमुक ने अपने तीसरे प्रस्ताव में कांग्रेस और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की आलोचना करते हुए उन पर एसआईआर को लेकर अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने सवाल उठाया कि कांग्रेस अन्य जगहों पर इस प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जबकि तमिलनाडु में इसे सही तरीके से लागू किये जाने की बात कह रही है।

प्रस्ताव में एक समाचार पत्र की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया। द्रमुक के अनुसार, इस रिपोर्ट से पता चलता है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाये गये, वहां टीवीके ने जीत हासिल की। द्रमुक ने एसआईआर पर टीवीके की चुप्पी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करने में उसकी कथित अनिच्छा पर भी सवाल उठाये। पार्टी ने कांग्रेस पर द्रमुक को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में विपक्ष की संयुक्त याचिका में शामिल नहीं होने के टीवीके के फैसले पर सवाल नहीं उठाये।

चौथे प्रस्ताव में एसआईआर को पूरी तरह रद्द करने और भविष्य के चुनावों में पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूचियों का इस्तेमाल करने की मांग की गयी। पार्टी ने कहा कि भविष्य में मतदाता सूचियों के किसी भी पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं को पर्याप्त समय और अवसर दिए जाने चाहिए।

द्रमुक ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने ईवीएम के नतीजों और मतदाता सत्यापन योग्य पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पर्चियों के बीच कथित विसंगतियों का हवाला दिया। उसने सभी वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराने और मतदान के लिए मतपत्र प्रणाली बहाल करने की अपनी मांग दोहराई।

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