नयी दिल्ली , जुलाई 19 -- लोकसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में परिसीमन विधेयक पर और अधिक स्पष्टता और दक्षिण के राज्यों के हितों की रक्षा की मांग की है।

पार्टी सांसद तिरुचि शिवा ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा, "दक्षिणी राज्यों पर असर डालने वाले किसी भी मुद्दे को द्रमुक कभी स्वीकार नहीं करेगी।"श्री शिवा ने सरकार से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन को लागू करने के लिए एक स्पष्ट फॉर्मूला बताने की मांग पर जोर देकर कहा कि कोटा निचले सदन के मौजूदा संख्या-बल पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा, "द्रमुक लोकसभा में मौजूदा संख्या-बल के आधार पर महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में है लेकिन हम परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर और स्पष्टता चाहते हैं।

श्री शिवा ने कहा, "अगर इसका असर दक्षिणी राज्यों पर पड़ता है, तो इसे 25 साल के लिए टाल दिया जाना चाहिए।" चूंकि संविधान संशोधन के लिए मौजूद और मत करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, इसलिए द्रमुक और राष्ट्रवादी कांंग्रेस पार्टी (शरद पवार) जैसी विपक्षी पार्टियों का समर्थन सरकार की स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है।

पिछले सत्र में एकजुट विपक्ष ने ही सरकार की कोशिश को नाकाम कर दिया था। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर द्रमुक और राकांपा (शरद पवार) जैसी विपक्षी पार्टियां समर्थन देती हैं, तो प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को पारित कराने की सरकार की संभावना काफी बढ़ जाएगी लेकिन अंतिम नतीजा मतदान के दिन की संख्या पर भी निर्भर करेगा। चूंकि संविधान संशोधन का फैसला सदन की कुल संख्या से नहीं बल्कि मौजूद और मत करने वाले सदस्यों से होता है, इसलिए विपक्षी पार्टियों के मत नहीं देने, अनुपस्थित रहने या बहिर्गमन करने से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा असल में कम हो जाएगा, जिससे सरकार की संभावना बेहतर हो जाएगी।

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