चेन्नई , जुलाई 3 -- द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता और पूर्व मंत्री ई. वी. वेलु आय से अधिक संपत्ति एवं सड़क अनुबंध अनियमितता मामले में पूछताछ के लिए सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (डीवीएसी) के समक्ष शुक्रवार को पेश नहीं हुए। उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पेश होने से असमर्थता जतायी है।

डीवीएसी ने आय से अधिक संपत्ति और सड़क अनुबंध कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में 25 जून को पूर्व मंत्री के परिसरों पर की गयी छापेमारी के दौरान नकदी और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किये थे। इसके बाद एजेंसी ने उन्हें शुक्रवार को पूछताछ के लिए उपस्थित होने का समन जारी किया था।

हालांकि, श्री वेलु की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि पूर्व मंत्री आज उपस्थित नहीं हो सके क्योंकि वह सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। वह लगभग 10 दिनों में इलाज के बाद वापस लौट आएंगे, जिसके बाद वह इस मामले में डीवीएसी अधिकारियों का सहयोग करेंगे। इसके साथ ही वकील ने पेशी के लिए एक नयी तारीख देने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि डीवीएसी के अधिकारियों ने 25 जून को तमिलनाडु के पूर्व राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री के परिसरों पर आय से अधिक संपत्ति और सड़क अनुबंध कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में छापेमारी की थी। डीवीएसी ने श्री वेलु, राजमार्ग विभाग के 10 अधिकारियों और एक ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि 2022 में अधूरे सड़क कार्यों के लिए भुगतान किया गया और सरकारी धन का गलत इस्तेमाल हुआ। साथ ही भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति रखने की भी जांच हो रही है।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में द्रमुक और अन्य दलों को हराकर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के सत्ता में आने के बाद डीवीएसी द्वारा द्रमुक के किसी भी पूर्व मंत्री के खिलाफ दर्ज किया गया यह पहला भ्रष्टाचार का मामला है।

रिपोर्टों के अनुसार, डीवीएसी अधिकारियों ने मामले से जुड़े आरोपियों के करीब 14 ठिकानों पर छापे मारे। इनमें श्री वेलु का चेन्नई स्थित घर, उनके शैक्षणिक संस्थान और डिंडिगुल में राजमार्ग विभाग के इंजीनियरों के ठिकाने शामिल हैं।

प्राथमिकी के अनुसार, यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी सहित कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। यह शिकायत अराप्पोर इयक्कम के संयोजक जयराम वेंकटेशन द्वारा प्रस्तुत एक याचिका के आधार पर दर्ज की गयी थी।

प्राथमिकी में तत्कालीन लोक निर्माण, राजमार्ग और लघु बंदरगाह मंत्री वेलु के साथ राजमार्ग विभाग के मौजूदा और पूर्व इंजीनियरों तथा ठेकेदार संकरनंद इंफ्रा का नाम शामिल है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलकर बिना काम कराए ही सड़क सुधार के लिए भुगतान मंजूर कर दिया।

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