चेन्नई , जून 16 -- तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) की सरकार में शामिल कांग्रेस के दो मंत्रियों राजेश कुमार और विश्वनाथन ने मंगलवार को अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को नसीहत दी है कि द्रमुक को अपने पूर्व गठबंधन सहयोगियों की आलोचना करने के बजाय हाल के विधानसभा चुनावों में मिली अपनी हार पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद टीवीके सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन उसके पास बहुमत नहीं था। द्रमुक के सहयोगी के रूप में 28 सीटों पर चुनाव लड़कर पांच सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने नतीजों के तुरंत बाद द्रमुक से अपना गठबंधन तोड़ लिया था। इसके बाद कांग्रेस ने टीवीके के साथ हाथ मिला लिया। इसके साथ ही कांग्रेस का सत्ता में आने का 59 साल लंबा इंतजार भी खत्म हो गया।
द्रमुक ने कांग्रेस के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उस पर जोरदार हमला बोला था और उसे 'धोखेबाज' व 'पीठ में छुरा घोंपने वाली' पार्टी करार दिया था। द्रमुक ने यह भी संकल्प लिया था कि वह भविष्य के चुनावों में कांग्रेस के साथ कोई संबंध नहीं रखेगी।
इसी पृष्ठभूमि में जारी एक संयुक्त बयान में दोनों मंत्रियों ने कहा कि द्रमुक को अपनी चुनावी हार के असली कारणों की पहचान करनी चाहिए, जिसमें यह भी शामिल है कि आखिर क्यों कुछ खास इलाकों में अल्पसंख्यक समुदायों और अनुसूचित जातियों (एससी) ने पार्टी का समर्थन नहीं किया।
बयान में कहा गया, "अपने (पूर्व) गठबंधन सहयोगियों को दोष देने और लगातार तीखी आलोचना करने के बजाय, द्रमुक को जमीनी हकीकत को समझना चाहिए।" उन्होंने कहा कि बार-बार की जाने वाली ऐसी गलतियां पार्टी की भविष्य की संभावनाओं को कमजोर कर सकती हैं।
नेताओं ने आगाह किया कि लगातार होने वाले गलत राजनीतिक फैसले प्रमुख मतदाता समूहों को पार्टी से दूर कर सकते हैं। उन्होंने द्रमुक से जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए एक प्रभावी और जिम्मेदार विपक्ष के रूप में काम करने का आग्रह किया।
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