बड़वानी , सितंबर 13 -- मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में महाराष्ट्र सीमा से लगे वरला थाना क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में तीन जिलों के 400 से अधिक पुलिसकर्मियों की 12 टीमों ने करीब दो दिन तक सर्चिंग अभियान चलाकर 19 गांवों से 11 हजार से अधिक गांजे के पौधे जब्त किए हैं। जब्त फसल का वजन 23 क्विंटल से अधिक और अवैध बाजार मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। पुलिस ने कार्रवाई में पांच प्रकरण दर्ज किए हैं।

पुलिस अधीक्षक पद्म विलोचन शुक्ला ने रविवार शाम पत्रकारों को बताया कि हाल ही में वरला थाना क्षेत्र में करीब 11 क्विंटल गांजे की फसल जब्त कर चार प्रकरण दर्ज किए गए थे। कार्रवाई के दौरान इसी क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी बड़े पैमाने पर गांजे की खेती किए जाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद व्यापक सर्च अभियान शुरू किया गया।

उन्होंने बताया कि निमाड़ रेंज की पुलिस उपमहानिरीक्षक सिमाला प्रसाद ने अभियान के लिए बड़वानी, खरगोन और खंडवा जिलों के 400 से अधिक पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धीरज बब्बर और सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे के नेतृत्व में 12 टीमें गठित की गईं। टीमों ने ड्रोन से निगरानी के साथ दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पैदल सर्चिंग की और 19 गांवों में कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार अभियान के दौरान करीब दो माह पुरानी गांजे की फसल के 11 हजार से अधिक पौधे जब्त किए गए, जिनका कुल वजन 23 क्विंटल से अधिक है। इनकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। ताजा कार्रवाई में पांच प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पूर्व की कार्रवाई को मिलाकर हाल में दर्ज नौ प्रकरणों में अब तक किसी आरोपी की पहचान अथवा गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पूर्व में गांजे की अवैध खेती प्राय: मक्का, तुअर, ज्वार या कपास जैसी फसलों के बीच की जाती थी, जिससे इसे आसानी से चिन्हित करना मुश्किल होता था। महाराष्ट्र सीमा से लगा यह क्षेत्र अत्यंत दुर्गम है और करीब 20 किलोमीटर तक ऐसे हिस्से हैं, जहां वाहन नहीं पहुंच सकते। पहाड़ियों से घिरे इस इलाके का फायदा उठाकर अब कुछ स्थानों पर अन्य फसलों के बीच गांजा लगाने के बजाय केवल गांजे की खेती किए जाने के संकेत मिले हैं।

सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे ने बताया कि खेती के बड़े पैमाने को देखते हुए संभावना है कि बाहरी क्षेत्र के लोग स्थानीय आदिवासियों को गांजे की खेती का प्रशिक्षण देकर उनसे खेती करवा रहे हैं और फसल तैयार होने के बाद उसे ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद ही इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आ सकेगी।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि खेती वन क्षेत्र में पाए जाने के कारण वन विभाग से संबंधित भूमि पर काबिज एवं पट्टाधारकों की जानकारी जुटाई जा रही है। खरगोन के डीएफओ रमेश राठौड़ ने बताया कि पुलिस द्वारा चिन्हित स्थान खरगोन जिले के सिरवेल वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वन विभाग संबंधित भूखंडों पर काबिज अथवा अधिकार रखने वाले लोगों की सूची तैयार कर बड़वानी पुलिस को देगा।

श्री शुक्ला ने कहा कि सूची प्राप्त होने के बाद अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले पट्टाधारकों के पट्टे अथवा भूमि अधिकार निरस्त करने की कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को लिखा जाएगा।

इस कार्रवाई ने करीब डेढ़ दशक पूर्व इसी क्षेत्र में हुए बड़े अभियान की याद भी ताजा कर दी है। वर्ष 2010 में तत्कालीन इंदौर पुलिस महानिरीक्षक संजय राणा के नेतृत्व में विभिन्न जिलों के करीब 800 पुलिसकर्मियों की टीम ने क्षेत्र में दबिश दी थी और करीब 10 प्रकरण दर्ज किए गए थे। उस समय बड़े पैमाने पर गांजे की खेती देखकर श्री राणा ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि गांजे की खेती यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन गई है। वरला थाना प्रभारी नारायण रावल ने बताया कि ताजा कार्रवाई को मिलाकर पिछले दो वर्षों में क्षेत्र में गांजे से संबंधित कुल 20 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।

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