नैनीताल , जुलाई 22 -- उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण और प्रदूषण के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य सरकार से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
एनजीटी के समक्ष पेश एनएमसीजी की रिपोर्ट के अनुसार रिस्पना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कुल 330 संरचनाएं चिह्नित की गई हैं। इनमें 324 को अवैध, जबकि छह को वैध श्रेणी में रखा गया है। इनमें 301 संरचनाएं सात अक्टूबर 2016 से पहले और 29 उसके बाद बनायी ईं। एनजीटी में यह मामला रिस्पना नदी के सूखे तल में कथित तौर पर झुग्गी बस्तियां बसाए जाने तथा घरेलू सीवेज, डेयरी अपशिष्ट और औद्योगिक प्रदूषण को नदी में छोड़े जाने की शिकायत पर चल रहा है। अधिकरण ने नदी के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन, अतिक्रमण की पहचान और उसे हटाने तथा नदी में गिर रहे बिना उपचारित सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट को रोकने को प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा माना है।
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