नयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कहा है कि देहरादून दिल्ली आर्थिक गलियारे से जुड़े देहरादून बाईपास का तेजी से निर्माण किया जा रहा है जिस शहर में भीड़ कम होगी और यातायात का बेहतर तरीके से संचालन किया जा सकेगा।
आधिकारिक सूचना के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) उत्तराखंड में 12 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बाईपास का निर्माण कर रहा है, जो दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ा होगा। इस परियोजना के तहत झझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के पांवटा साहिब-बल्लूपुर खंड को जोड़ने वाले नए ग्रीनफील्ड मार्ग का विकास किया जा रहा है, जो आशारोरी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़कर समाप्त होगा।
एनएचएआई के अनुसार लगभग 716 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में अब तक करीब 44 प्रतिशत काम हो चुका है और इसके अगले साल अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। यह पूर्णतः एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग देहरादून के लिए एक वैकल्पिक दक्षिण-पश्चिमी मार्ग के रूप में कार्य करेगा, जिससे गैर-गंतव्य यातायात को शहर के मुख्य शहरी क्षेत्र से हटाकर सेलाक्वी औद्योगिक क्षेत्र, विकासनगर, हर्बर्टपुर और पांवटा साहिब की ओर मोड़ा जाएगा। इससे शहर में यातायात जाम और वाहन प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित उत्तरी राज्यों के साथ अंतर-राज्यीय संपर्कता को भी बेहतर बनाएगी। परियोजना को पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। सड़क की डिजाइन गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि कुछ वन क्षेत्रों में इसे 80 किलोमीटर प्रति घंटा रखा गया है। राजमार्ग की चौड़ाई (राइट ऑफ वे) को 30 मीटर तक सीमित रखा गया है, जो सामान्य 60 मीटर से कम है, जिससे वन क्षेत्र और पेड़ों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। वन क्षेत्रों से गुजरने के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनमें 350 मीटर लंबा वाहन ओवरपास और एक समर्पित पशु ओवरपास शामिल हैं। इसके अलावा सात छोटे पुल, 21 बॉक्स कल्वर्ट और छोटे जीवों के लिए पांच विशेष ह्यूम पाइप कल्वर्ट बनाए जाएंगे।
सुरक्षा उपायों के तहत पूरे मार्ग पर बाड़बंदी की जा रही है और वन्यजीव क्षेत्रों व गति सीमा को दर्शाने वाले संकेतक लगाए जा रहे हैं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष कम किया जा सके।
आधिकारिक सूचना में कहा गया है कि परियोजना पूर्ण होने के बाद देहरादून के निवासियों को भारी और पारगमन यातायात से राहत मिलेगी, जिससे शहरी गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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