नयी दिल्ली , मई 29 -- देश में 95.6 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से हुआ है और रोटावायरस टीकाकरण कवरेज दोगुने से अधिक हो गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने से भारत पूर्ण टीकाकरण कवरेज में महत्वपूर्ण सुधार की ओर अग्रसर है और इसमें 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में यह जानकारी दी गई है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को यहां जारी आज यहां राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण - 6 में कहा गया है कि 95.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) प्राप्त हुई। इसके साथ ही पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल का लाभ उठाने वाली माताओं की संख्या 70.0 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गई।

संस्थागत प्रसव मामलों में 88.6 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, इससे भारत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के करीब पहुंच गया है। कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसवों में 89.4 प्रतिशत से 91.3 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जबकि प्रसव के दो दिनों के भीतर डॉक्टर/नर्स/लेडी हेल्थ विजिटर (एलएचवी)/सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम)/मिडवाइफ/अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा नवजात शिशुओं की प्रसवोत्तर देखभाल में 79.1 प्रतिशत से 85.3 प्रतिशत का सुधार हुआ है।

इस सर्वेक्षण का संचालन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 2023-24 के दौरान मुंबई स्थित अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस) के सहयोग से नोडल एजेंसी के रूप में किया गया था। 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को कवर करने वाला यह सर्वेक्षण जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण संकेतकों पर महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है और जिला स्तर तक साक्ष्य-आधारित योजना और कार्यक्रम कार्यान्वयन में सहयोग करता है।

इसमें मातृ पोषण संकेतकों में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। गर्भावस्था के दौरान 100 दिनों या उससे अधिक समय तक आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट का सेवन करने वाली माताओं की संख्या 44.1 प्रतिशत से बढ़कर 54.9 प्रतिशत हो गई, जबकि 180 दिनों या उससे अधिक समय तक सप्लीमेंट का सेवन करने वाली माताओं की संख्या 26.0 प्रतिशत से बढ़कर 37.8 प्रतिशत हो गई।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.0 पर स्थिर है। गर्भनिरोधक उपयोग दर (सीपीआर) 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई है। इसमें मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारत सार्वभौमिक टीकाकरण कवरेज की दिशा में लगातार मजबूत प्रगति कर रहा है। टीकाकरण कार्ड के आधार पर 12-23 महीने की आयु के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है। देश में 95.6 प्रतिशत बच्चों को अधिकांश टीके सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से लगाए गए। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति समुदाय के विश्वास की पुष्टि होती है। 12 से 23 महीने की आयु के बच्चों को मिलने वाले सभी टीकों का प्रतिशत लगातार 96 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है। प्रमुख टीकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। रोटावायरस टीकाकरण कवरेज में 36.4 प्रतिशत से 85.4 प्रतिशत तक उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। खसरा युक्त टीके की दूसरी खुराक की कवरेज भी 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत हो गयी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 बाल पोषण परिणामों में उत्साहजनक प्रगति का संकेत देता है। स्वास्थ्य बीमा/वित्तपोषण योजना का दायरा परिवारों के स्तर पर 41.0 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है। यह स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों की सफलता को दर्शाता है। आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) जैसी प्रमुख योजनाओं ने विशेष रूप से कमजोर आबादी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह विस्तार सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और देश भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों से महिलाओं की डिजिटल पहुंच और वित्तीय सशक्तिकरण में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है। इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी होकर 33.3 प्रतिशत से 64.3 प्रतिशत हो गई है। बैंक या बचत खातों का स्वयं उपयोग करने वाले वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89.0 प्रतिशत हो गई है, और मोबाइल फोन का स्वयं उपयोग करने वाले वाली महिलाओं की संख्या 53.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.6 प्रतिशत हो गई है।

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