वाराणसी , जुलाई 23 -- उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी पर स्वच्छ, हरित एवं आधुनिक जल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) ने गेल (इंडिया) लिमिटेड के सहयोग से "इलेक्ट्रिक बोट कन्वर्जन पायलट परियोजना" के तहत पहली बार इलेक्ट्रिक यात्री नौकाओं का संचालन शुरू किया।
परियोजना के प्रथम चरण का शुभारंभ गुरुवार को नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में महापौर अशोक कुमार तिवारी ने किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक नौकाओं को इलेक्ट्रिक प्रणाली में परिवर्तित की गई पहली पांच नौकाओं का लोकार्पण किया।
अधिकारियों ने बताया कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वच्छ, हरित एवं सतत विकास के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर अपनी पारंपरिक नौकाओं को इलेक्ट्रिक नौकाओं में परिवर्तित कराने वाले दीपक साहनी, राकेश साहनी, ज्योतीलाल निषाद, दीपक कुमार साहनी और शुभम साहनी को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। नाविकों ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी तथा गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
वीडीए के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में कुल 20 यात्री नौकाओं को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक प्रणाली में परिवर्तित किया जा रहा है। इनमें से पहली पांच नौकाएं बुधवार को नाविकों को समर्पित की गईं। उन्होंने कहा कि पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर इसे आगे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा, जिससे वाराणसी देश के अन्य नदी शहरों और अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए स्वच्छ एवं हरित जल परिवहन का मॉडल बन सकेगा।
महापौर श्री तिवारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक नौकाओं के संचालन से वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण में कमी आएगी तथा कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक प्रणाली अपनाने से नाविकों की संचालन लागत में लगभग 80 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान है, जिससे उनका व्यवसाय अधिक लाभकारी होगा। साथ ही पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को अधिक शांत, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल जल परिवहन की सुविधा मिलेगी।
आयरा इलेक्ट्रिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गगन कुमार मेहता ने बताया कि प्रत्येक इलेक्ट्रिक नौका में 15 किलोवाट क्षमता की इलेक्ट्रिक आउटबोर्ड मोटर, 20 किलोवाट-घंटे का लिथियम बैटरी पैक, ईवी चार्जर, डिजिटल डिस्प्ले, जीपीएस ट्रैकिंग तथा रिमोट मॉनिटरिंग प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक नौका सामान्य परिचालन में अस्सी घाट से नमो घाट के बीच न्यूनतम तीन चक्कर (राउंड ट्रिप) लगाने में सक्षम है। चयनित घाटों पर आवश्यक मानकों के अनुरूप चार्जिंग अवसंरचना भी विकसित की गई है।
कार्यक्रम के समापन पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, नाविकों और अन्य अतिथियों ने इलेक्ट्रिक नौकाओं से नमो घाट से भदैनी घाट तक जल भ्रमण कर परियोजना का अनुभव प्राप्त किया। इस अवसर पर गेल (इंडिया) लिमिटेड के महाप्रबंधक सुशील कुमार भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पायलट परियोजना भविष्य में वाराणसी सहित देश के अन्य अंतर्देशीय जलमार्गों पर इलेक्ट्रिक जल परिवहन के विस्तार का आधार बनेगी तथा स्वच्छ, हरित और सतत विकास के राष्ट्रीय अभियान को नई गति प्रदान करेगी।
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