जयपुर , मार्च 30 -- देश में रबी 2025-26 के लिए 119.4 लाख टन सरसों के उत्पादन का अनुमान हैं जो 3.5 प्रतिशत की बढ़त हैं।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने रबी 2025-26 सीजन के लिए सरसों की फसल का पहला उत्पादन अनुमान जारी किया और सोमवार को यहां एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस अनुमान के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर सरसों की बुवाई का रकबा बढ़ कर 93.91 लाख हेक्टेयर हो गया है जबकि वर्ष 2024-25 में यह 92.15 लाख हेक्टेयर था। अनुकूल मौसम और खेती के बेहतर तरीकों के कारण, औसत पैदावार भी बढ़कर 1271 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है जो पिछले साल 1250 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। नतीजतन कुल उत्पादन 119.4 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले सीजन के 115.2 लाख टन उत्पादन की तुलना में एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है। उत्पादन में बढ़ोतरी मुख्य रूप से ज्यादा जमीन पर खेती और साथ ही मुख्य उत्पादक राज्यों में उत्पादकता में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी की वजह से हुई है।

श्री अस्थाना ने कहा ''करीब 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ, यह विकास का सफर 2019-20 के लगभग 86 लाख टन से बढ़कर मौजूदा साल में लगभग 120 लाख टन तक पहुंचना बेहतर खेती के तरीकों, किसानों में ज्यादा जागरूकता और सरकार की मददगार नीतियों का सबूत है। उन्होंने बताया कि राज्यों के स्तर पर राजस्थान देश में सरसों के उत्पादन में सबसे आगे बना हुआ है जहां उत्पादन का अनुमान 53.9 लाख टन है जबकि उत्तरप्रदेश में उत्पादन में काफी बढोतरी दर्ज की गई है जो 18.1 लाख टन तक पहुंच गया है जहां मध्यप्रदेश में उत्पादन में थोड़ी-बहुत गिरावट देखी गई और यह 13.9 लाख टन रहा, वहीं हरियाणा में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली और उत्पादन 12.7 लाख टन तक पहुंच गया।

इसी प्रकार दूसरे राज्यों पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है जहां उत्पादन का अनुमान क्रमशः 7.4 लाख टन और 5.9 लाख टन है। असम में पैदावार कम होने की खबर है, जिससे उत्पादन घटकर 2.1 लाख टन रह गया है जबकि बिहार में उत्पादन लगभग स्थिर रहा और 0.9 लाख टन पर बना रहा।

इस अवसर पर एसईए रेपसीड-मस्टर्ड प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय डाटा ने कहा कि कुल मिलाकर रबी 2025-26 की सरसों की फसल एक अच्छा दृष्टिकोण पेश करती है जो भारत में तिलहन की उपलब्धता की स्थिति को और मजबूत करती है हालांकि पैदावार और खेती के रकबे में क्षेत्रीय अंतर उत्पादन के परिदृश्य को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।

एसईए (मुंबई) के कार्यकारी निदेशक डॉ बी. वी. मेहता ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि एसईए इस बात पर जोर देता है कि ये अनुमान और अवलोकन अभी अस्थाई हैं और बदलते कृषि-संबंधी हालात, रियल-टाइम रिमोट सेंसिंग इनपुट और ज्यादा गहन विश्लेषणात्मक आकलन के आधार पर इनमें बदलाव हो सकता है। जैसे-जैसे मौसम आगे बढ़ेगा, बुवाई के रकबे और कटाई की अपडेटेड रिपोर्ट साझा की जाएगी। एसोसिएशन अपनी पैदावार और उत्पादन के अनुमानों की पुष्टि करने के लिए अप्रैल-मई के दौरान अपना तीसरा और अंतिम फील्ड सर्वे करेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित