चेन्नई , सितंबर 25 -- देश में अपनी तरह की पहली पहल करते हुए तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार शाम को पुझल स्थित केंद्रीय जेल-दो में नशीली दवाओं के अपराधियों के लिए एक व्यापक नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम 'पीएवाईएएनएएम' (यात्रा) की शुरुआत की।

इसका उद्देश्य परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहायता के माध्यम से उन्हें पुनः समाज में एकीकृत करना है।

देश की अपनी तरह की इस पहली पहल 'पीएवाईएएनएएम (पॉजिटिव अवेयरनेस यील्डिंग अगेंस्ट नारकोटिक्स एडिक्शन मूवमेंट) नशीली दवाओं के अपराधियों के लिए व्यापक नशा मुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम' को एक महती परियोजना के रूप में तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक/ जेल एवं सुधार सेवा महानिदेशक संदीप राय राठौड़ ने शुरू किया।

जेल विभाग और सुधार सेवाओं ने नशे से पीड़ित लोगों के पुनर्वास की आवश्यकता को समझा है। इसीलिए परामर्श, मनोवैज्ञानिक सहायता, चिकित्सीय हस्तक्षेप, जीवन-कौशल विकास और पुनर्वास सहायता के माध्यम से 'पीएवाईएएनएएम' को नशा मुक्ति, व्यवहार में बदलाव, पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण पर केंद्रित एक संरचित कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है।

इस अवसर पर श्री राठौड़ ने कहा कि नशीली दवाओं की लत न केवल व्यक्ति को बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि सुधार प्रणाली की जिम्मेदारी केवल हिरासत तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें उपचार, सुधार, पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण भी शामिल होना चाहिए।

कैदियों के सुधार, पुनर्वास और कल्याण के लिए विभिन्न सुविधाएं और अवसर प्रदान करने तथा निरंतर समर्थन के लिए तमिलनाडु सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 'पीएवाईएएनएएम' मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नशामुक्त तमिलनाडु बनाने के हालिया जोर के अनुरूप है। इसका ध्यान केवल जागरूकता और रोकथाम पर ही नहीं, बल्कि नशा मुक्ति, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक पुनरेकीकरण पर भी केंद्रित है।

उन्होंने 'पीएवाईएएनएएम' मॉड्यूल की परिकल्पना एवं डिजाइन तैयार करने और इस महती परियोजना को लागू करने में जेल विभाग के साथ साझेदारी करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं 'प्रिज्म' के प्रबंधक न्यासी रवि कुमार पॉल और उनकी टीम की विशेष सराहना की। उन्होंने इस पहल को एक सार्थक पुनर्वास कार्यक्रम बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और निरंतर सहयोग का जिक्र किया।

राष्ट्रीय स्तर पर भी रोकथाम, उपचार, नशा मुक्ति, पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया जा रहा है। 'पयनम' ऐसे ही दृष्टिकोण को संरचित तरीके से जेल के माहौल में लागू करने का प्रयास करता है।

श्री राठौड़ ने कहा कि विभाग आवश्यक सहायता, परामर्श और अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन बदलने का निर्णय व्यक्ति के भीतर से ही आना चाहिए। उन्होंने कैदियों को इस कार्यक्रम का सकारात्मक उपयोग करने, अपने कौशल का विकास करने और रिहाई के बाद बेहतर जीवन के लिए खुद को तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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