जयपुर , अगस्त 12 -- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) राजस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. आर. रवि बाबू ने हथकरघा क्षेत्र को आजीविका सृजन, महिला सशक्तिकरण तथा पारंपरिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताते हुए कहा है कि देश में लगभग 35 लाख परिवार हथकरघा गतिविधियों से जुड़े हुए हैं और राजस्थान में दस हजार से अधिक बुनकर इस क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है।

डॉ बाबू नाबार्ड राजस्थान क्षेत्रीय कार्यालय के तत्वाधान में बुधवार को आयोजित "विकसित भारत के लिए ग्रामीण शिल्पकारों का सशक्तिकरण" विषय के साथ मनाये गये 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नाबार्ड समेकित ग्रामीण विकास के लिए कृषि एवं गैर-कृषि दोनों क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रहा है। हथकरघा गणना 2019-20 का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि देश में लगभग 35 लाख परिवार हथकरघा गतिविधियों से जुड़े हैं तथा राजस्थान में 10 हजार 90 बुनकर इस क्षेत्र में कार्यरत हैं।

उन्होंने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार, ऋण उपलब्धता, विपणन संपर्क तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों की आय में वृद्धि, आजीविका सुरक्षा तथा जमीनी स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए सभी हितधारकों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

उन्होंने नाबार्ड की विभिन्न पहलों जैसे राजस्थान के 23 उत्पादों के लिए जीआई पंजीकरण एवं अधिकृत उपयोगकर्ता पंजीकरण, ग्रामीण मार्ट, ग्रामीण हाट, उत्पादक संगठनों के संवर्धन, प्रदर्शनियों के आयोजन तथा कौशल एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का प्रथम आयोजन वर्ष 2015 में चेन्नई में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।

कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी अपनाने, डिज़ाइन नवाचार, शिल्पकार संगठनों को सशक्त बनाने तथा शिल्पकार सशक्तिकरण के लिए हितधारकों के समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से संबंधित विभिन्न योजनाओं, चुनौतियों एवं अवसरों पर विचार-विमर्श किया तथा वित्तीय समावेशन, कौशल विकास, विपणन सहायता और संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में आयोजित संवादात्मक सत्र में शिल्पकारों एवं अन्य हितधारकों ने अपने अनुभव साझा किए तथा राजस्थान के हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के सतत विकास हेतु सहयोगात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया।

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