चंडीगढ़ , अक्टूबर 15 -- हरियाणा के ऊर्जा परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने उच्चतम न्यायालय के खिलाफ विपक्षी दलों के मार्च पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना किसी स्थापित राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के आह्वान पर कई दलों का एकजुट होना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आशंका जताई कि देश में अस्थिरता पैदा करने वाली कोई ताकत विपक्षी दलों को एकजुट कर रही है।

श्री विज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में प्रदर्शन करना हर राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उच्चतम न्यायालय के खिलाफ मार्च निकालना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश की अदालतें स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं। इस मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्वयं संज्ञान लिया है और आगे क्या कार्रवाई करनी है, यह अदालत पर निर्भर करता है।

श्री विज ने सवाल उठाया कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वामपंथी दलों के नेता एक साथ कैसे आ गए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जवाब तलाशना चाहिए कि इन सभी दलों को एक मंच पर लाने वाली शक्ति कौन है।

उन्होंने विपक्ष पर देश में अस्थिरता पैदा करने वाली ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब सामाजिक कार्यकर्ता को पता था कि नशा कहां बिक रहा है, तो सरकारी एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। उन्होंने कहा कि सरकार को घटना से पहले ही नशे के कारोबार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

उन्होंने कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के महंगाई संबंधी बयान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि लोगों को अलग-अलग वर्गों में बांटने के बजाय सभी को समान रूप से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता कभी निम्न वर्ग तो कभी मध्यम वर्ग की बात करते हैं, जबकि सभी वर्गों की समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है।

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