जोधपुर , अगस्त 26 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस नेताराहुल गांधी के मनुस्मृति पर दिये बयान पर कहा है कि वह देश को बांटने वाले बयान दे रहे हैं।

श्री शेखावत ने बुधवार को यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि श्री गांधी को भारत की हजारों साल पुरानी संस्कृति, सभ्यतागत चेतना, वेदों, पुराणों और उपनिषदों की कितनी जानकारी है, यह उनके मनुस्मृति पर दिये गये बयान से स्पष्ट दिया है।

उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक विषय पर उसके मूल संदर्भ और तत्कालीन परिस्थितियों को समझे बिना टिप्पणी करना या अपने राजनीतिक लाभ के लिए उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करना सर्वथा अनुचित और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक मान-बिंदुओं के प्रति जन-आस्था को प्रदूषित करने तथा हमारे गौरवशाली इतिहास को नीचा दिखाने के लिए पिछले लगभग 200 वर्षों में कई सुनियोजित प्रयास हुए। अंग्रेजों ने जानबूझकर यह काम किया। स्वतंत्रता के बाद जब हमारे पास अवसर था कि हम अपने इतिहास और सांस्कृतिक मान-बिंदुओं को सही करते, तब श्री गांधी के पूर्वजों के शासनकाल में इसे सुधारने के बजाय और अधिक गति से हमारी सभ्यतागत चेतना को दूषित करने का कार्य किया गया। आज भी उसी मानसिकता के साथ देश को बांटने वाले बयान दिये जा रहे हैं।

श्री शेखावत ने कहा कि भारत वह समाज और सभ्यता है, जिसने मातृशक्ति को 'इंस्टीट्यूशनलाइज्ड रिस्पेक्ट' दिया है। जहां ज्ञान के लिए मां सरस्वती, शक्ति के लिए मां दुर्गा और धन-समृद्धि के लिए मां महालक्ष्मी की पूजा की जाती है, जहां गार्गी, मैत्रेयी और कात्यायनी जैसी महान विदुषी स्त्रियां हुई हों, उस महान समाज और व्यवस्था के विषय में इस प्रकार की तहत टिप्पणी करना न केवल अशोभनीय एवं निंदनीय है, बल्कि यह उनके ज्ञान के उथलेपन को भी उजागर करता है।

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