पटना , सितंबर 03 -- बिहार के कला और संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने गुरुवार को कहा कि आज देश के नौजवान बच्चों में ऊर्जा भरी हुई है और उसे सही दिशा देने का काम शिक्षक ही कर सकते हैं।

डॉ. कुमार ने कहा कि शिक्षण महज एक पेशा नही है और शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र के निर्माण में भागीदारी की तरह देखा जाना चाहिए।

कला और संस्कृति मंत्री ने आज नई दिशा परिवार की ओर से आयोजित राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि नदियों के उफान और देश के नौजवानों जेन(जी) के तूफान में साम्यता यह है कि दोनो ही अनियंत्रित होने पर देश मे तबाही तथा नियंत्रित होने पर खुशहाली ले आएंगे।

मंत्री डॉ. कुमार ने कहा कि प्राचीन काल मे भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्व गुरू था। उन्होंने नालंदा,तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों की चर्चा की और कहा कि प्राचीन फ्रांसीसी लेखक बर्नियर ने उस जमाने में कहा था कि इस समय ज्ञान के लिए दुनिया को भारत की जरूरत है, भारत को दुनिया की जरूरत नही है।

डॉ.कुमार ने कहा कि नौजवानों को उनके गुरु ही परखते हैं और सांचे में ढाल कर कुंदन बनाते हैं। उन्होंने कहा कि कभी चाणक्य ने चंद्रगुप्त को परखा और महान सम्राट बना दिया। इसी तरह रामकृष्ण परमहंस नही होते तो शायद देश को कालजयी ज्ञानी स्वामी विवेकानंद नही मिलते, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को दिशा दिखाई।

कला और संस्कृति मंत्री डॉ. कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए आवश्यक है कि नौजवानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उनकी ऊर्जा को सही दिशा दी जाए। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों का आह्वान किया कि वह राष्ट्र निर्माण में भागीदारी करते हुए नई पीढ़ी को उचित दिशा दें।

इस कार्यक्रम में मंत्री डॉ.,प्रमोद कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ठ योगदान देने वाले 31 शिक्षकों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम को सिक्किम और मेघालय के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, मशहूर गणितज्ञ के.सी सिन्हा, पटना की महापौर सीता साहू , हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ, नई दिशा परिवार के संयोजक कमल नयन श्रीवास्तव, सचिव राजेश राज एवं मुख्य संरक्षक राजेश वल्लभ ने भी संबोधित किया।

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