सहारनपुर , मई 15 -- उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष शीतल टंडन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील कोई अभूतपूर्व कदम नहीं है, बल्कि देशहित में आर्थिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई नैतिक अपील है।

उन्होंने कहा कि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी वर्ष 1967 में ऐसी अपील कर चुकी हैं। वर्ष 1967 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बेहद सीमित था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देशवासियों से सोना नहीं खरीदने का आग्रह किया था और इसे राष्ट्रीय अनुशासन का हिस्सा बताया था। उन्होंने कहा कि उस दौर में सरकार ने सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए 'गोल्ड कंट्रोल ऑर्डर' जैसे कड़े कदम भी उठाए थे, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई अपील का मुख्य उद्देश्य भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करना तथा रुपये को कमजोर होने से बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है, बल्कि आर्थिक चुनौतियों के बीच देशहित में की गई एक नैतिक अपील है।

शीतल टंडन ने कहा कि भारत के इतिहास में राष्ट्रीय संकट के समय नेताओं द्वारा जनसहयोग की अपीलें की जाती रही हैं। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा भारत को खाद्यान्न आपूर्ति रोकने की चेतावनी दिए जाने पर शास्त्री जी ने देशवासियों से सप्ताह में एक समय का भोजन त्यागने की अपील की थी।

उन्होंने कहा कि शास्त्री जी का उद्देश्य देश को आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का संदेश देना था। इसी दौर में उन्होंने "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया था, जिससे सैनिकों और किसानों दोनों का मनोबल बढ़ाया जा सके।

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