पटना , फरवरी 19 -- कांग्रेस सांसद और पार्टी के वर्किंग कमिटी के सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की चर्चा करते हुए गुरुवार को कहा कि देशहित को गिरवी रख व्यापार समझौता मंजूर नहीं हो सकता है।

श्री हुड्डा ने कहा कि किसी दूसरे देश के साथ व्यापार समझौता आर्थिक तरक्की का रास्ता बन सकता है, लेकिन ऐसे समझौतों का आधार ही दोनों देश के बीच बराबरी और लोकहित से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्यागकर गुलामी की शर्त पर नहीं किये जा सकते!कांग्रेस के नेता ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने भारत के किसानों एवं खेत-खलिहान के हितों की बलि दे दी है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा की सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया गया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत की डिजिटल स्वायत्ता तथा डेटा प्राईवेसी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार ने भारत की संप्रभुता एवं आत्मनिर्भरता से समझौता कर लिया है।

श्री हुड्डा ने कहा कि यह समझौता भारत के कृषि बाजार में अमेरिका के खेती एवं खाद्य उत्पादों का आयात किसान की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है और इसके अनुसार भारत बिना किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य एवं कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोल देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका 42.50 करोड़ मीट्रिक टन मक्का उत्पादन करता है और उसे इसे बेचने के लिए उसे भारत जैसा बड़ा बाजार चाहिए,जिसका भारत के मक्का किसानों को इसका सीधा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इस व्यापार समझौते में अमेरिका से 'ज्वार' के आयात की बात भी है और भारत में ज्वार का 52 लाख मीट्रिक टन उत्पादन करने वाले बड़े प्रांत हैं, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा गुजरात इससे प्रभावित होंगे।

कांग्रेस के नेता ने कहा कि ऐसी ही स्थति भारत का सालाना सोयाबीन और कपास के किसानों की होने वाली है। उन्होंने कहा कि 09 फरवरी, 2026 को अमेरिका ने पड़ोसी देश, बांग्लादेश से व्यापार समझौता किया, जिसमें स्पष्ट तौर से कहा गया कि बांग्लादेश अमेरिकी कपास एवं धागा आयात कर जो कपड़ा एवं वस्त्र अमेरिका को निर्यात करेगा, उस पर अमेरिका में जीरो शुल्क लगेगा। इसके विपरीत, भारत से होने वाले निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा। इससे तिरुपुर, सूरत, पानीपत, लुधियाना एवं पूरे देश के वस्त्र उद्योग पर भी विपरीत असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगला बड़ा झटका भारत के फल और मेवा उत्पादकों यानी सेब, नासपाती, अमरूद, संतरा, स्ट्रॉबेरी, केला आदि तथा बादाम, अखरोट, पिस्ता, मूंगफली और अन्य उत्पादकों को लगेगा क्योंकि अमेरिका से इस सामानों के आयात को शुल्क-मुक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के लाखों किसान इससे गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के केला और मूंगफली किसान भी इससे प्रभावित होंगे।

श्री हुड्डा ने कहा कि गंभीर बात यह है कि उसी आदेश के सेक्शन 4 में अमेरिका के राष्ट्रपति ने लिखा कि वह भारत की निगरानी करेगा और यदि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से कच्चा तेल खरीदा तो फिर भारत पर पैनल्टी दोबारा लगा दी जाएगी।

संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, डॉ शकील अहमद खान , हरियाणा के पूर्व मंत्री रावदान सिंह , मीडिया चेयरमैन राजेश राठौड़, अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव, विधायक मनोज विश्वास , अभिषेक रंजन , सुरेन्द्र कुशवाहा मौजूद थे।

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