बेंगलुरु , मई 11 -- पूर्व प्रधानमंत्री और जद (एस) के संरक्षक एच.डी. देवेगौड़ा ने सोमवार को कर्नाटक सरकार पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी एकमात्र चिंता किसानों की बिगड़ती स्थिति है।
इस दौरान उन्होंने राज्य में कटहल, इमली और जामुन उत्पादकों के लिये एक समर्पित बोर्ड बनाने की वकालत की।
श्री देवेगौड़ा ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा, "मैं कर्नाटक सरकार के बारे में बात नहीं करना चाहता। मैं यहां केवल किसानों की समस्याओं के संबंध में बात करने आया हूं। यही मेरी चिंता है।" खुद को "देश का सबसे वरिष्ठ राजनेता" बताते हुये पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह राजनीतिक मुद्दों पर "जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष" पर नहीं पहुंचना चाहते, बल्कि वह चाहते हैं कि ध्यान कृषि संकट और फसल कटाई के बाद किसानों को होने वाले नुकसान पर बना रहे।
उन्होंने कहा, "देश का सबसे वरिष्ठ राजनेता होने के नाते, मैं जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहता। मैंने जीवन में विभिन्न चुनौतियों का सामना किया है और मैं यहां केवल किसानों की समस्याओं को समझने के लिये हूं।" देवेगौड़ा ने कटहल, इमली और जामुन जैसे फलों के लिये शीत गृह (कोल्ड स्टोरेज) और संगठित विपणन सुविधाओं की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में उपज बर्बाद हो रही है जिससे किसान परेशान हैं।
श्री देवेगौड़ा ने कहा, "यदि इन फलों को शीत गृहों में ठीक से संग्रहित नहीं किया गया, तो ये बर्बाद हो जाएंगे। जब बाजार अनुकूल हो, तब इन्हें शीत गृहों से निकालकर बेचा जाना चाहिये।" जद (एस) संरक्षक ने कहा कि उन्होंने कर्नाटक में उत्पादकों के संरक्षण, भंडारण और विपणन सहायता में सुधार के लिये बिहार के 'मखाना बोर्ड' की तर्ज पर इन तीन श्रेणियों की उपज के लिये एक विशेष बोर्ड बनाने का प्रस्ताव दिया है।
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