भोपाल , मई 15 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने देवास जिले की पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट को प्रशासनिक भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण का परिणाम बताते हुए मामले में फैक्टरी मालिक और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि यह विस्फोट केवल संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है, जिसकी कीमत मजदूरों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि मजदूर पहले से ही श्रम कानूनों के उल्लंघन, रोजगार की असुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्टरी की स्थापना से लेकर विस्फोट तक भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के प्रमाण सामने आए हैं। जसविंदर सिंह के अनुसार पटवारी की रिपोर्ट में पास में घनी आबादी और पेट्रोल पंप होने का उल्लेख कर संभावित दुर्घटना की आशंका जताई गई थी, इसके बावजूद लाइसेंस जारी किया गया।

माकपा नेता ने कहा कि 23 दिसंबर 2025 को लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी फैक्टरी संचालित होती रही। इसके अलावा 14 मार्च को फैक्टरी में आग लगने की घटना और 16 मार्च को ग्राम कलमा की सरपंच कविता गौड़ द्वारा कारखाना बंद करने की मांग किए जाने के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की और छह मई को लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील फैक्टरी के निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गए थे, क्योंकि वहां पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और आग बुझाने की व्यवस्था तक नहीं थी।

माकपा ने बयान में कहा कि पेटलावद विस्फोट और देवास घटना में भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। पार्टी ने मामले में राजनीतिक संरक्षण की भी जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा तथा घायलों के संपूर्ण उपचार के साथ 10 लाख रुपये सहायता राशि देने की मांग की है।

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